Donald Trump Iran war strategy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य हमलों को टालने के फैसले के बाद मध्य पूर्व में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय से जारी इस संघर्ष के बीच खाड़ी के देश अमेरिका की स्पष्ट रणनीति न होने से लगातार चिंतित हैं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख अमेरिकी सहयोगी देशों को डर है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का सीधा असर उनकी क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ रहा है। लगातार होते ईरानी हमलों के कारण खाड़ी देशों ने वाशिंगटन से अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियों और सुरक्षा गारंटी की मांग की है।
ट्रंप के सबसे करीबी खाड़ी देश हुए ईरान के खिलाफ उनकी युद्ध रणनीति से परेशान, जानें- क्या है मामला?
हमलों पर रोक और कूटनीतिक प्रयास
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में कतर और सऊदी अरब के मध्यस्थता प्रयासों के चलते उन्होंने सैन्य कार्रवाई रोक दी। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करने के लिए नए प्रस्तावों पर चर्चा शुरू हुई है।
कतरी मध्यस्थों ने ईरान के सामने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नए जहाजरानी मार्गों का प्रस्ताव रखा है, जिस पर तेहरान ने शुरुआती सहमति जताई है। हालांकि, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की ईरान की शर्त पर अमेरिका अभी भी असहमत है।
खाड़ी देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण
खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में ईरान को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। जहां सऊदी अरब कूटनीतिक संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन कर रहा है, वहीं यूएई ईरान पर कठोर सैन्य कार्रवाई का पक्षधर रहा है।
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा कि संघर्ष बढ़ाने से क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी ओर, यूएई का मानना है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को जब तक सैन्य रूप से पीछे नहीं धकेला जाएगा, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के क्या मायने हैं?
इस स्थिति से साफ है कि अमेरिका अपने खाड़ी सहयोगियों के बिना ईरान के खिलाफ कोई बड़ा कदम नहीं उठा सकता है। खाड़ी देश अमेरिका को सैन्य ठिकाने, हवाई क्षेत्र और खुफिया जानकारी प्रदान करते हैं, इसलिए उनकी चिंताओं को नजरअंदाज करना वाशिंगटन के लिए मुश्किल है।
ट्रंप के लिए यह संदेश स्पष्ट है कि मध्य पूर्व में उनके सहयोगियों का समर्थन बिना शर्त नहीं है। अमेरिकी घरेलू राजनीति और आगामी मध्यवधि चुनावों के दबाव के बीच ट्रंप भी अब सीधे युद्ध के बजाय कूटनीतिक समझौते की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
