Iran US and Israel War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा फैसला करते हुए ईरान पर हमला पांच दिनों के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने कहा है कि युद्ध रोकने पर दोनों देशों के बीच 'सार्थक बातचीत' हुई है। आगे यह बातचीत यदि सकारात्मक रही तो 'सीजफायर' हो सकता है। हालांकि, ईरान ने बातचीत के राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को खारिज किया है। ईरान की संसद के स्पीकर ने कहा है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने इसे 'फर्जी खबर' बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि 'हालात अभी बहुत ही 'अस्थिर' हैं और ईरान के साथ बातचीत की अटकलों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए जब तक की व्हाइट हाउस की तरफ से इसकी पुष्टि न हो जाए।'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
पाकिस्तान को मध्यस्थता का प्रस्ताव?
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और अमेरिका के बीच एक बैठक कराने का प्रस्ताव पाकिस्तान को भेजा गया है। इस बैठक में अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाड़ी के देशों ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान के बिजली संयंत्रों पर यदि हमले हुए युद्ध का 'खतरनाक रूप' ले सकता है। ट्रंप अचानक से पांच दिनों के 'सीजफायर' की तरफ क्यों बढ़े, इसके बारे में एक्स्पर्ट्स की कई राय है।
कच्चे तेल की कीमतें कम करने के लिए दिया बयान!
रिपोर्टों में कहा गया है कि खाड़ी देशों के तेल रिफाइनरियों एवं गैस स्टेशनों पर ईरान के हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज करीब-करीब बंद होने के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले दिनों कच्चे तेल एवं गैस की कीमतें 110 डॉलर से अधिक हो गईं। देशों में गैस एवं तेल की किल्लत बढ़ती जा रही है। अमेरिका में भी इसका असर होने लगा है। वहां महंगाई बढ़ रही है। यह दबाव ट्रंप महसूस कर रहे हैं। पांच दिनों तक हमला न करने के उनके बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर 110 डॉलर के नीचे आ गईं।
दिमोना परमाणु संयंत्र पर हमले से हिले ट्रंप-रिपोर्ट
दूसरा, हमले रोकने वाले ट्रंप के बयान को इजराइल के दिमोना परमाणु संयंत्र पर हुए ईरान के हमले से भी जोड़ा जा रहा है। ईरान ने यहां बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। बताया जा रहा है कि इस हमले में परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है और कई लोगों के हताहत और घायल होने की बात कही जा रही है। कहा जा रहा है दिमोना पर हुए हमले के बाद ट्रंप काफी हिल गए हैं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि खाड़ी देशों एवं इजराइल पर ईरान के हमलों अमेरिका चाह कर भी पूरी तरह से रोक नहीं पा रहा है। युद्ध बढ़ता ही जा रहा है। ईरान को रोकने एवं उसे अपनी शर्त मनवाने के लिए ट्रंप को थोड़ा समय चाहिए। ट्रंप प्रशासन युद्ध की नई रणनीति के लिए समय चाहता है। इसलिए उन्होंने बातचीत का 'झांसा' दिया है।
'बातचीत के झांसे' में ईरान को फंसाना चाहते हैं ट्रंप
हालांकि, ट्रंप पहले भी बातचीत का 'झांसा' देकर ईरान पर दो बार हमले कर चुके हैं। इसलिए जानकार इसे ईरान को बातचीत में उलझाने की एक 'तिकड़म' मान रहे हैं। खुद इस युद्ध को लेकर ट्रंप बार-बार बयान बदलते आए हैं जिनसे उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। ईरान पहले भी 'धोखा' खा चुका है। इसलिए उसने ट्रंप के बयान को 'फर्जी' बता दिया। पांच दिनों के सीजफायर वाले ट्रंप के बयान के बाद भी ईरान का हमला इजराइल पर जारी है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल के दक्षिणी इलाके में मिसाइलों से हमले होने की रिपोर्टें हैं।
