Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में चीन के कथित दखल पर सनसनीखेज दावा किया। ट्रंप ने गुरुवार को (स्थानीय समयानुसार) देश को संबोधित करते हुए चीन पर गंभीर आरोप लगाए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि 2020 के चुनाव में उन्हें हराने के लिए चीन ने साजिश रची। साथ ही उन्होंने देश की खुफिया एजेंसियों में कथित रूप से शामिल 'डीप स्टेट' पर चीन के 'दखल' से जुड़ी हुई सूचनाओं एवं जानकारियों को दबाने का आरोप लगाया। ट्रंप ने चीन के 'दखल' से जुड़ी जानकारियां राष्ट्रपति एवं अमेरिकी जनता से छिपाने वाले कथित 'कवर-अप' की जांच कराने की घोषणा की।
ट्रंप ने चीन पर लगाया चुनावी डेटा चुराने का आरोप। तस्वीर-AI
राष्ट्रपति और जनता से छिपाई गई जानकारी-ट्रंप
चुनाव अखंडता पर दिए अपने संबोधन में ट्रंप ने हाल ही में सार्वजनिक किए गए कुछ दस्तावेजों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'दस्तावेजों के नए सेट से यह साफ होता है कि हमारी खुफिया एजेंसियों में बैठे 'डीप स्टेट' के सदस्यों ने चीन के खतरनाक चुनावी दखल से जुड़ी जानकारियों को सक्रिय रूप से दबाया और कम करके दिखाया। इस सच को न सिर्फ तत्कालीन राष्ट्रपति से बल्कि अमेरिकी जनता से भी छिपा कर रखा गया।'
करोड़ों वोटर्स का डेटा चोरी होने का दावा
ट्रंप ने आरोप लगाया कि अमेरिकी जासूसी एजेंसियों को 2020 में ही पता चल गया था कि चीन ने 18 राज्यों के करोड़ों मतदाताओं का डेटा या तो खरीद लिया है, चुराया है या फिर उसे हैक कर लिया है। इसके बावजूद इस संवेदनशील जानकारी को न तो राष्ट्रपति के सामने रखा गया और न ही संसद (कांग्रेस) को इसकी जानकारी दी गई। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा, 'वे बस यही दोहराते रहे कि यह हमारे देश के इतिहास का सबसे सुरक्षित चुनाव है।'
बाइडेन के लिए फर्जी मतपत्र और पत्रकारों को पैसे देने का आरोप
डीक्लासिफाइड (सार्वजनिक किए गए) दस्तावेजों और सीआईए (CIA) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्रंप ने कई चौंकाने वाले दावे किए। ट्रंप ने आरोप लगाया कि 2020 में FBI के पास ऐसी खुफिया जानकारी थी कि चीन ने जो बाइडन के पक्ष में अवैध मतपत्र तैयार करने की कोशिश की थी, लेकिन भ्रष्ट नौकरशाहों ने कथित रूप से इस रिपोर्ट को दबा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उस समय चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने उनके खिलाफ माहौल बनाने के लिए अमेरिकी व्यवसायियों और पत्रकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया। दस्तावेजों के मुताबिक, बीजिंग ने उन पत्रकारों की पहचान करने की कोशिश की जो ट्रंप के खिलाफ लिखते थे, ताकि उन्हें और ज्यादा नकारात्मक खबरें लिखने के लिए बड़ी रकम दी जा सके।
उच्च स्तरीय जांच, सख्त कार्रवाई के निर्देश
व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2020 की चुनावी प्रक्रिया के दौरान चीन ने अवैध रूप से 22 करोड़ अमेरिकी मतदाता फाइलों को हासिल किया था, जिसे इतिहास का सबसे बड़ा चुनावी डेटा समझौता माना जा रहा है। इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक के कार्यालय, न्याय विभाग, FBI और CIA को इस खुफिया जानकारी को छिपाने के कारणों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि जो भी अधिकारी इस मामले को दबाने में शामिल पाए जाएंगे, उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाएंगे।
