US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर इस्लामाबाद में वार्ता पर पेच फंस गया है। वार्ता टलने के संकेत मिल रहे हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सीजफायर पर बातचीत के लिए ईरान का कोई शिष्टमंडल इस्लामाबाद नहीं पहुंचा है। रिपोर्ट के मुताबिक न तो ईरान का शिष्टंडल इस्लामाबाद पहुंचा है और न ही अभी कोई बातचीत तय है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों एवं तेवरों से यह लगने लगा था कि युद्धविराम पर होने वाली बातचीत पटरी से उतर सकती है।
इस्लामाबाद में होनी है सीजफायर पर वार्ता।
बयानों के बाद परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं जिनसे बातचीत के पटरी से उतरने की आशंका बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच सीजफायर पर यह वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में हालिया युद्धविराम बेहद नाज़ुक स्थिति में है और लेबनान पर इजरायली हमलों ने हालात को और जटिल बना दिया है।
ईरान ने खारिज की 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट खारिज
ईरान के सरकारी मीडिया ने इस बात से इनकार किया है कि शनिवार को होने वाली वार्ता के लिए कोई ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा है। उसने 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने का दावा किया गया था। साथ ही, फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से दोहराया गया कि जब तक लेबनान में सीजफायर नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका के साथ शांति वार्ता में शामिल होने की ईरान की कोई योजना नहीं है।
सीजफायर वार्ता में इजराइल, मध्य पूर्व के देश शामिल नहीं
एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि सीजफायर पर होने वाली इस वार्ता में इजराइल शामिल नहीं है और न ही सऊदी अरब, कतर और यूएई शामिल हैं। ऐसे में इस वार्ता में युद्ध का कोई स्थायी हल निकलेगा, इस पर संदेह है। दूसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान द्वारा टोल वसूलने को लेकर ट्रंप ने सख्त बयान दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों से 'अवैध शुल्क' वसूलने का आरोप लहाया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए लिखा कि 'ऐसी खबरें हैं कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों से शुल्क ले रहा है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए और अगर वे कर रहे हैं, तो वे इसे अभी बंद कर दें!'
आकांताओं को दंडित करेंगे-मोजतबा
तो वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई ने सीजफायर से पहले बड़ा बयान दिया है। ईरान के सरकारी टेलिविजन पर प्रसारित अपने संदेश में मोजतबा ने कहा कि अमेरिका-इजराइल ने जो 'आक्रामकता दिखाई है, उसे बिना दंड के नहीं जाने दिया जाएगा।' सुप्रीम लीडर ने कहा है कि इस्लामााद में होने वाली वार्ता में हमलों में हुए नुकसान की भरपाई और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण पाने की मांग की जाएगी। मोजतबा ने पश्चिम एशिया के इस युद्ध में अपनी जीत की घोषणा की और युद्ध के दौरान साहस दिखाने के लिए उन्होंने अपने सशस्त्र बलों एवं लोगों की प्रशंसा भी की।
नेतन्याहू बोले-लेबनान पर नहीं लागू है सीजफायर
लेबनान पर हमले को लेकर नेतन्याहू ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। गुरुवार-शुक्रवार की रात जारी हुए एक वीडियो संदेश के जरिए देश को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने साफ किया कि लेबनान में फिलहाल किसी भी तरह का युद्धविराम लागू नहीं है। उन्होंने दोहराया कि इजरायली वायुसेना और थल सेना हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अपनी पूरी ताकत के साथ प्रहार जारी रखेगी। नेतन्याहू का यह रुख उन अटकलों के बीच आया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि ईरान के साथ हुए समझौते के तहत लेबनान में भी शांति बहाल की जा सकती है। नेतन्याहू ने अपने संबोधन में उत्तरी इजरायल के निवासियों की अटूट सहनशक्ति की सराहना की।
फिर खुल सकता है युद्ध का मोर्चा
उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों का प्राथमिक उद्देश्य इन नागरिकों की सुरक्षा को बहाल करना है, जो पिछले कई महीनों से हिजबुल्लाह के रॉकेट हमलों का सामना कर रहे हैं। नेतन्याहू ने साफ शब्दों में संदेश दिया कि जब तक सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले इजरायली परिवार पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तब तक इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। जाहिर है कि तीनों नेता अपने रुख को लेकर काफी सख्त हैं। हिज्बुल्ला पर हमले को लेकर ईरान नाराज है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों से टोल वसूलने को लेकर ट्रंप ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। मोजतबा ने इजराइल और अमेरिका को 'दंड' देने की बात कही है। सीजफायर वार्ता से पहले नेताओं के ये रुख युद्धविराम पर होने वाली वार्ता को पटरी से उतार सकते हैं। ये देश युद्ध के मोर्चे पर फिर लौट सकते हैं।
