China Covid-19 Crisis:भारत और चीन के बीच सीमा पर तनातनी जारी है। इस बीच दोनों देश LAC पर अपना जमावड़ा बढ़ा रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बयान दिया है कि भारत ने चीन की सीमा पर अभी तक की सबसे बड़ी तैनाती कर दी है। लेकिन इस बीच चीन पिछले तीन दशक के अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रहा है। वहां पर कोरोना बेकाबू हो गया है। अस्पताल भरे पड़े है, श्मशानों में लंबी कतारें हैं, हालात इस कदर बेकाबू हैं कि दवाओं की भी किल्लत होने लगी है। प्रसिद्ध महामारी विशेषज्ञ फेगल-डिंग ने ट्वीट कर लिखा है चीन में अगले 90 दिनों में 60 फीसदी आबादी कोरोना से संक्रमित हो जाएगी।
चीन में कोविड-19 से बुरा हाल
बेहद बुरे हैं हालात
महामारी विशेषज्ञ एरिक फेगल-डिंग ने सोशल मीडिया पर चीन के कई चौंकाने वाले वीडियो शेयर किए हैं। जिसमें अस्पतालों के बदतर हालात दिखाई पड़ रहे हैं। उन्होंने कोरोना पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगले 90 दिन में चीन की 60 फीसदी आबादी और दुनिया के 10 फीसदी लोग कोरोना से संक्रमित हो जाएंगे। और इसकी वजह से लाखों लोगों के मरने की आशंका है।
Catch up on the situation in China… it’s bad. Very bad. See full thread 🧵 before you complain about the numbers— t.co/U94RNXuN4r
— ANI (@ANI) Dec 20, 2022
जिनपिंग सरकार ने लोगों को मरने के लिए छोड़ा
एरिक फेगल-डिंग ने एक अन्य वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा है कि चीन में सरकार ने लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। उसकी नीति यह है कि जिसे संक्रमण हो रहा है उसे होने दो, जो मर रहा है उसे मरने दो। यानी जल्दी संक्रमण, जल्दी मौतें, जल्दी पीक और उसके बाद सब कुछ जल्दी ही ठीक हो जाएगा। चीन में जीरो कोविड कोविड पॉलिसी खत्म होने के बाद से संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है।
Holy cow—famed Beijing Opera singer Chu Lanlan 储兰兰 died in Beijing - reportedly due to complications from #COVID. S… t.co/tAbH9NP3wy
— ANI (@ANI) Dec 20, 2022
वैक्सीन और वैक्सीनेशन पर सवाल
कोरोना की वैक्सीन को लेकर चीन के रवैये पर हमेशा से संदेह रहा है। क्योंकि जिनपिंग ने चीन की ही वैक्सीन पर भरोसा जताया है। रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार चीन में अभी तक 57 फीसदी व्यस्कों ही बूस्टर डोज लगी है। इसके अलावा 65 साल से ऊपर की आबादी के 42,3 फीसदी लोगों को बूस्टर डोज लगी है। हालांकि चीन के आंकड़ों को लेकर भी हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। और जिस तरह से संक्रमण के नए मामले आ रहे हैं, उससे वैक्सीन और वैक्सीनेशन दोनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
आर्थिक संकट में भी फंसे
कोविड की सख्ती की वजह से चीन में बेरोजगारी भी बढ़ गई है। कमर्शियल गतिविधियां ठप हो गई थी। इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। कई शहरों में इस साल प्रॉपर्टी के दाम 20 प्रतिशत से ज्यादा गिरे हैं। हाल के महीनों में बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां गई हैं। चीन में रोजगार संकट बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि चीन में 16 से 24 साल का हर पांचवां युवा बेरोजगार है।
