UNGA: 'दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते'; यूएन के मंच से जयशंकर ने पाकिस्तान को लगाई लताड़

उन्होंने अपने संबोधन के दौरान खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव पर चिंता जाहिर करते हुए अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नाविकों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

इस समय संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की कार्यवाही चल रही है। इस सत्र में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेश मंत्री या देशों के प्रतिनिधि अपना पक्ष रख रहे हैं। इसी क्रम में आज विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नमस्कार से अपने संबोधन की शुरुआत की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में दुनिया के सामने मौजूद बढ़ते खतरों और दबावों का जिक्र करते हुए आतंकवाद, सीमा पार आतंकवाद और विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना कर रही है। ऐसे हालात में दुनिया विनाश की कगार पर खड़ी है और एक और गलत कदम उसे उस कगार से आगे धकेल सकता है।

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UNGA में जयशंकर ने उठाई आवाज. (Photo: PTI)

गल्फ में संघर्ष और जहाजों पर हमले पर चिंता

जयशंकर ने कहा कि भारत गल्फ में संघर्ष देख रहा है और जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। समुद्री जहाजों के क्रू मेंबर्स को निशाना बनाना अस्वीकार्य है।

‘भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित’

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र और नाविकों का बड़ा स्रोत देश है। ऐसे में संघर्ष वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाने का आह्वान किया।

यूक्रेन संघर्ष चिंता का विषय

विदेश मंत्री ने यूक्रेन में जारी संघर्ष को भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई स्तरों पर तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। जयशंकर ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल भरोसे और सद्भावना वाला नहीं है। उन्होंने कहा, “We are seeing weaponization of everything.” यानी दुनिया में हर चीज के हथियारीकरण की स्थिति देखने को मिल रही है।

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