आसीम मुनीर के अमिट दाग..., पश्चिमी मीडिया छुड़ाते-छुड़ाते थक जाएगी; पर गंदे कारनामे नहीं भूल पाएगी दुनिया

आज ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के लिए दिन रात एक करने वाले पाकिस्तान और उसे सेना प्रमुख आसिम मुनीर को पश्चिमी मीडिया शांतिदूत साबित करने में लगी है। लेकिन सवाल यह है कि पुलवामा और पहलगाम हमले जैसे मानवता के प्रति सबसे बड़े गुनाहों के दाग कभी उनके माथे से मिट पाएंगे?

Pahalgam Terror Attack Anniversary: एक साल पहले आज के ही दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में स्थित बायसरन घाटी में पाकिस्तान परस्त आतंकियों ने मौत का खूनी खेल खेला था। हंसते खेलते लोगों से भरा बायसरन घाटी का मैदान अचानक चीख-पुकार से भर गया था। सीमापार कर घुसपैठ कर घुसे आतंकियों ने धर्म-पूछ पूछ कर मार डाला था। मानवता के सबसे जघन्य कृत्यों में शुमार इस घटना में 26 लोगों की हत्या कर दी गई थी। एक साल पहले आज के ही दिन एम4कार्बाइन और एके-47 से लैस तीन आतंकवादी जो सेना की वर्दी में थे, उन्होंने वहां मौत का नंगा नाच किया। आतंकियों ने पीड़ितों से धार्मिक पहचान साबित करने के लिए इस्लामी कलमा तक पढ़वाया, जब वे नहीं पढ़ पाए तो करीब से गोली मार दी गई। यह सिर्फ हत्या नहीं थी, बल्कि सुनियोजित धार्मिक घृणा का प्रदर्शन था। फैसल जट्ट (उर्फ सुलेमान शाह), हबीब ताहिर (उर्फ जिब्रान) और हमजा अफगानी इन तीनों ने इस आतंकी साजिश को अमलीजामा पहनाया जो आतंकी हमले से ठीक छह दिन पहले आज दुनिया में'शांतिदूत' बनकर अपने दागों को मिटाने की कोशिश करने वाले आसिम मुनीर के बड़े नैरेटिव का हिस्सा थी, एक ऐसा नैरेटिव जिसे आसीम मुनीर के भड़काऊ बयान में देखा जा सकता है।

Asim munir

नहीं मिटेंगे आसिम मुनीर के काले दाग। (AP)

ऐसे बढ़ा आसिम का कद

उस समय पाकिस्तानी सेना स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग कर रही बलूच मुक्ति सेना के हमलों से जूझ रही थी। दूसरी ओर, अफगान तालिबान पाकिस्तानी सेना पर भारी दबाव बना रहे थे। सेना के भीतर भी मतभेद की खबरें थीं और मुनीर घरेलू राजनीतिक मामलों को लेकर दबाव में थे। फिर, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और मुनीर की किस्मत पूरी तरह बदल गई। ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन "बनियान-उल-मरसूस" शुरू किया। 7 से 10 मई के बीच हुई झड़पों के बाद, युद्धविराम की घोषणा की गई। पाकिस्तान ने झूठा दावा करते आसिम मुनीर को इस मनगढ़ंत जीत का हीरो बताया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मुनीर को दोपहर के भोजन पर आमंत्रित किया और उनके साथ एक गुप्त बैठक की। मुनीर ने तुर्की जैसे देशों का दौरा किया। सभी प्रमुख कार्यक्रमों में वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ प्रमुखता से दिखाई देने लगे। इससे दुनिया को पता चला कि मुनीर की ताकत किस कदर बढ़ती जा रही है।

End of Feed