अनुरा दिसानायके: हाशिए पर पड़ी पार्टी में फूंकी जान, भ्रष्ट राजनीति से थक चुके लोगों की बने उम्मीद

दिसानायके देश के प्रमुख बनने वाले श्रीलंका के पहले मार्क्सवादी नेता हैं। जेवीपी के विस्तृत मोर्चे ‘नेशनल पीपुल्स पावर’ के (एनपीपी) नेता दिसानायके के भ्रष्टाचार विरोधी संदेश और राजनीतिक संस्कृति में बदलाव के उनके वादे ने उन युवा मतदाताओं में विश्वास पैदा किया जो आर्थिक संकट के बाद से व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे थे।

Anura Kumara Dissanayake: श्रीलंका के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करने वाले मार्क्सवादी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके ने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर इस द्वीपीय देश की सत्ता के शिखर तक पहुंचने का रास्ता काफी उतार चढ़ाव के साथ तय किया है। इस उपलब्धि को हासिल करने की अपनी यात्रा में उन्होंने खुद को युवा मतदाताओं और पारंपरिक राजनेताओं की भ्रष्ट राजनीति से थक चुके लोगों के लिए एक रहनुमा के रूप में पेश किया। प्रधान न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने सोमवार को राष्ट्रपति सचिवालय में श्रीलंका के नौवें राष्ट्रपति के रूप में 56 वर्षीय दिसानायके को शपथ दिलाई।

Anura dissanayake

अनुरा कुमारा दिसानायके

आधी सदी पुरानी पार्टी में आई जान

इस पद पर उनका पहुंचना उनकी आधी सदी पुरानी पार्टी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के लिए भी एक अहम बदलाव है, जो लंबे समय से हाशिये पर थी। वह देश के प्रमुख बनने वाले श्रीलंका के पहले मार्क्सवादी नेता हैं। जेवीपी के विस्तृत मोर्चे ‘नेशनल पीपुल्स पावर’ के (एनपीपी) नेता दिसानायके के भ्रष्टाचार विरोधी संदेश और राजनीतिक संस्कृति में बदलाव के उनके वादे ने उन युवा मतदाताओं में विश्वास पैदा किया जो आर्थिक संकट के बाद से व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे थे। साल 2019 में पिछले राष्ट्रपति चुनाव में केवल तीन प्रतिशत वोट हासिल करने के बाद एनपीपी की लोकप्रियता 2022 के बाद से तेजी से बढ़ी है।

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