मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच संयुक्त रक्षा समझौता होने के दो महीने बाद, बुधवार को दोहा में पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया ने एक नया बहुपक्षीय रक्षा समझौता किया। इसका उद्देश्य सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना और रक्षा विनिर्माण, प्रशिक्षण तथा अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करना है।
'बद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग'
तुर्की के रक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, 'बद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (Badr MoU) नामक इस समझौते पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर, कतर के उप-प्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुल रहमान, तथा इंडोनेशिया के उप-रक्षा मंत्री यूसुफ जौहरी ने हस्ताक्षर किए।
कतर के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस समझौते का लक्ष्य चारों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना और रक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
यह 'बद्र समझौता' उस घटना के दो महीने बाद हुआ है, जब अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' (Makkah Joint Defence Agreement) पर हस्ताक्षर किए थे। उस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होने पर उसे सभी पर हमला माना जाएगा, जिससे इन देशों के बीच एक सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता कायम होती है।
रक्षा उद्योगों और सैन्य प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए समझौता
'X' पर एक पोस्ट में, कतर के रक्षा मंत्रालय ने इस समझौते को आपसी सहयोग को मजबूत करने और इसमें शामिल देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी विकसित करने की दिशा में एक कदम बताया। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा विनिर्माण में सहयोग को बढ़ावा देना, इसमें शामिल देशों की रक्षा क्षमताओं में सुधार करना, और तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा विकास के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करना है। इसका उद्देश्य आधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों और उद्योगों के विकास में मदद करना भी है, जिससे ये चारों देश अपनी क्षमताओं को एक साथ मिलाकर उभरती हुई सैन्य जरूरतों को पूरा कर सकें।
कतर के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि समझौता इसमें शामिल देशों के लिए काफी आर्थिक महत्व रखता है, क्योंकि आपसी सहयोग और एकीकरण से उन्हें अपनी रक्षा औद्योगिक क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिल सकती है। मंत्रालय ने आगे कहा कि इस व्यवस्था से इन देशों को अपने सहयोगी और मित्र राष्ट्रों की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।
