US Presidential Election 2024: अमेरिकी चुनाव का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे चुनावी माहौल और तीव्र और तीखा होता जा रहा है। अगले प्रेसिडेंशियल डिबेट के लिए डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी में माहौल बन चुका है। जो बाइडेन के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से पीछे हटने और कमला हैरिस के ताल ठोकने के बाद ट्रंप के साथ उनका मुकाबला दिलचस्प हो गया है। कई सर्वे में कमला रेटिंग में ट्रंप से आगे निकल चुकी हैं। जानकार मान रहे हैं कि चुनावी मुकाबला जोरदार होगा। यही नहीं नवंबर में होने वाले चुनाव में यदि कमला जीत दर्ज करती हैं तो वह 188 साल का रिकॉर्ड तोड़ देंगी। दरअसल, 188 साल बाद कोई वह उप राष्ट्रपति पद पर रहते हुए राष्ट्रपति बन सकती हैं। कमला पहले से ही उप राष्ट्रपति हैं, चुनाव जीतकर वह इतिहास बना सकती हैं।
अमेरिका में नवंबर में होगा राष्ट्रपति पद का चुनाव।
उपराष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश 1988 में राष्ट्रपति बने
साल 1836 के बाद से, केवल एक मौजूदा उपराष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश 1988 में राष्ट्रपति पद पर चुने गए थे। उपराष्ट्रपति रहते हुए व्हाइट हाउस पहुंचने की कोशिश में असफल रहे लोगों में 1960 में रिचर्ड निक्सन, 1968 में ह्यूबर्ट हम्फ्री और 2000 में अल गोर शामिल रहे हैं। युद्ध और घोटालों से लेकर अपराध और टेलीविजन पर होने वाली बहसों जैसे मुद्दों से प्रभावित चुनावों में तीनों हार गए। लेकिन प्रत्येक उपराष्ट्रपति के लिए दो अन्य कारक भी महत्वपूर्ण साबित हुए: क्या निवर्तमान राष्ट्रपति लोकप्रिय थे और क्या राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बीच संबंध अच्छे थे? प्रिंसटन विश्वविद्यालय में इतिहास और सार्वजनिक मामलों के प्रोफेसर जूलियन जेलिजर कहते हैं, ‘लोग वास्तव में चाहते हैं कि दोनों मिलकर काम करें।’
यह भी पढ़ें- PM मोदी, गृह मंत्री शाह जैसी होगी RSS प्रमुख भागवत की सुरक्षा, Z प्लस नहीं अब ASL के दायरे में रहेंगे
बुश ने मैसाचुसेट्स के गवर्नर को हराया
उन्होंने कहा, ‘अगर उपराष्ट्रपति जिस व्यक्ति के साथ काम कर रहा है, वह लोकप्रिय है तो लोग उसकी कार्यशैली को पसंद करते हैं।’ साल 1988 में, बुश ने मैसाचुसेट्स के गवर्नर डेमोक्रेट माइकल डुकाकिस को आसानी से हरा दिया, जिन्हें रिपब्लिकन ने कमजोर और संपर्क से परे करार दिया था। बुश को एक ठोस अर्थव्यवस्था और शीत युद्ध के तनाव में कमी से मदद मिली। राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की स्वीकृति रेटिंग 1986-87 के ईरान-कॉन्ट्रा घोटाले के मद्देनजर तेजी से गिरने के बाद बढ़ी और रीगन तथा बुश ने चुनाव अभियान के दौरान एक साथ अच्छा काम किया।
‘रीगन द्वेष रखने वाले व्यक्ति नहीं थे'
रीगन ने अपने उपराष्ट्रपति का खुलकर समर्थन किया, जिन्होंने 1980 के प्राइमरी में उनके खिलाफ चुनाव लड़ा था। उन्होंने रिपब्लिकन सम्मेलन में बुश की प्रशंसा एक प्रतिबद्ध और अमूल्य भागीदार के रूप में की, कैलिफोर्निया की एक रैली में उनके साथ दिखाई दिए और मिशिगन, न्यू जर्सी और मिसौरी में सभाओं में भाषण दिया। इतिहासकार-पत्रकार जोनाथन डारमन ने कहा, ‘रीगन द्वेष रखने वाले व्यक्ति नहीं थे। और बुश ने उपराष्ट्रपति रहते हुए अपने रिश्ते की जटिलता से बाहर निकलने का काम अच्छी तरह से किया।’
आइजनहावर की लोकप्रियता का फायदा नहीं उठा सके निक्सन
जब गोर 2000 में चुनाव लड़े, तो उन्हें जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश की तरह ही लाभ मिला। अर्थव्यवस्था मजबूत थी, देश में शांति थी और राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को व्हाइट हाउस की इंटर्न मोनिका लेविंस्की के साथ उनके संबंध को लेकर महाभियोग के बावजूद उच्च रेटिंग प्राप्त थी। गोर ने इससे पहले के आठ वर्षों में क्लिंटन के साथ मिलकर काम किया था, लेकिन इस स्कैंडल के कारण उनके बीच तनाव बना रहा। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति की मौजूदगी को कम से कम रखा और डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में अपने ‘एक्सेप्टेंस’ भाषण में खुद को अपने दम पर चुनाव में उतरा नेता बताया। जानकार लोग मानते हैं कि क्लिंटन से उनकी दूरी ही उन्हें चुनाव में झटका देने वाली साबित हुई। गोर की तरह, निक्सन भी तत्कालीन राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर की लोकप्रियता का फायदा नहीं उठा सके या नहीं उठाना चाहते थे।
