Viral Video: भारत में रहने वाले एक कनाडाई कंटेंट क्रिएटर फ्राइसन ने दो भारतीय शहरों के ध्वनि प्रदूषण के स्तर की तुलना की। इसका वीडियो शख्स ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है जो कि कुछ ही देर में वायरल हो गया। आइजोल में रहने वाले कैलेब फ्राइसन ने इंस्टाग्राम पर जो वीडियो शेयर किया है उसमें बेंगलुरु और आइजोल दोनों में शाम के पीक ऑवर के दौरान ट्रैफिक के शोर की तुलना की गई है। शख्स शाम 7:00 बजे बेंगलुरु के ट्रैफिक के शोर को दिखाता है। वीडियो में वह कहता है, 'भारतीय एक-दूसरे से बेहतर के हकदार हैं। बस इसे सुनो।' इसके बाद कनाडाई शख्स लगातार हॉर्न बजाने और इंजनों की आवाज के साथ भरी हुई सड़कों को दिखाता है।
वीडियो के दूसरे हिस्से में शख्स आइजोल के शांत और व्यवस्थित दृश्य को दिखाता है। उस सीन में हॉर्न नहीं बज रहा है। फ्राइसन कहते हैं, 'वैसे, यह वास्तव में वह जगह है जहां मैं रहता हूं। ध्यान दें कि यहां कोई हॉर्न नहीं बज रहा है। ऐसा वास्तव में इसलिए है क्योंकि उन्होंने आइजोल में नो-हॉर्न नीति लागू की है। पुलिस वास्तव में शांति भंग करने वाले लोगों पर जुर्माना लगाती है।'
कंटेंट क्रिएटर ने बताया कि आइजोल की सड़कें संकरी और ढलानदार होने के बावजूद ड्राइवर बिना किसी शिकायत के ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं। उन्होंने कहा, 'बहुत से लोगों को यह एहसास नहीं होता कि यहां की ज़्यादातर सड़कें सिर्फ़ एक लेन चौड़ी हैं। लेकिन फिर भी लोग अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं। वे कतार में खड़े हो जाते हैं और जब आगे निकलने के लिए जगह होती है, तब भी वे आगे निकलने से बचते हैं। और वे हॉर्न भी नहीं बजाते। आइजोल में ड्राइवर हॉर्न बजाने के बजाय सामने से आने वाले वाहनों के लिए अपनी हेडलाइट कम कर लेते हैं। वे समझते हैं कि हॉर्न बजाने से कोई मदद नहीं मिलती। इससे सिर्फ़ हालात और खराब होते हैं। यहं के लोग एक-दूसरे का ज़्यादा सम्मान करते हैं। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि भारत के बाकी लोग भी इस बात को समझें। '
शेयर किए जाने के बाद से, इस वीडियो को 642,000 से ज़्यादा बार देखा गया और 42,000 से ज़्यादा लाइक मिले। इस पर कई सोशल मीडिया यूज़र्स की तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं, जिनमें से कई कंटेंट क्रिएटर से सहमत थे। एक यूजर ने लिखा, 'मैं एक भारतीय हूं और मैं आपकी आलोचना और लोगों के लिए विचार के कुछ अंशों से सहमत हूं और उनका समर्थन करता हूं। यहां कोई भी व्यक्ति बदलने वाला नहीं है, आपका उद्देश्य अगले 1000 वर्षों तक सिर्फ एक उद्देश्य ही बना रहेगा। अगर उन्हें मौका मिला तो वे चांद और मंगल पर हॉर्न बजाने का मौका नहीं छोड़ेंगे।' दूसरे ने कहा कि, 'बेंगलुरु में गाड़ी चला रहे हैं? तर्क को भूल जाइए! यह एक खुली छूट है, जहां कोई भी कहीं से भी आ सकता है। हॉर्न बजाना ही आपकी एकमात्र चेतावनी है - लेकिन जब यातायात रुका हुआ हो, तो यह आखिरी चीज है जिसे आप सुनना चाहते हैं।' तीसरे यूजर ने कहा, 'हॉर्न बजाने पर कोई जुर्माना नहीं है और हां, हॉर्न बजाने के लिए कानून का क्रियान्वयन भी शून्य है। किसी ने हमें हॉर्न न बजाने के लिए नहीं कहा, लोग हॉर्न नहीं बजाते और हम बस वही कर रहे हैं जो दूसरे कर रहे हैं।'
