कई दफा जिंदगी में ऐसे मोड़ आते हैं, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं होती। कुछ ऐसा ही हुआ अमेरिका के आइओवा सिटी में जन्मे एक बच्चे के साथ, जिसने मात्र 21 हफ्ते की गर्भावस्था में ही इस दुनिया में अपना कदम रख दिया था। जन्म के वक्त इस बच्चे का वजन महज 283 ग्राम था। ऐसी अजीब स्थिति में भी इस बच्चे ने अपनी जिंदगी के लिए जंग लड़ी और वह जीत भी गया। इस चमत्कार की वजह से ही आज इस बच्चे का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।
नैश की उम्र आज एक साल से भी ज्यादा है। (Youtube/@GWR)
मात्र 21 हफ्ते में रख दिया था इस दुनिया में कदम
अपनी जीवन की जंग को जीतने वाले इस बच्चे का नाम नैश है। नैश का जन्म 5 जुलाई 2024 को हुआ था। उस वक्त उसकी मां मोल्ली 21 हफ्ते की गर्भावस्था में थी। सामान्य तौर पर एक बच्चा 40 हफ्ते की गर्भावस्था के बाद ही जन्म लेता है, लेकिन नैश मात्र 21 हफ्ते में ही अपनी मां के गर्भ से बाहर आ गया था। नैश के इस दुनिया में कदम रखते ही डॉक्टरों ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे और ऐसे में उसका बचना असंभव बता दिया था।
नैश की मुस्कान हर किसी को उम्मीद ना छोड़ने के लिए प्रेरित करती है। (Youtube/@GWR)
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज
जब नैश का जन्म हुआ तब वह एक छोटे से कपकेक से भी हल्का था। उसका वजन उस वक्त मात्र 283 ग्राम था। मालूम हो कि इतने कम समय में जन्म लेने वाले बच्चों के जिंदा रहने की संभावना न के बराबर होती है। फिर भी, किस्मत ने नैश के लिए कुछ और ही लिख रखा था। नैश ने जन्म के साथ ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपनी जगह बना ली। नैश का नाम 'सबसे प्रीमैच्योर बच्चे के रूप में जो जीवित बचा' के तौर पर दर्ज है।
6 महीने तक अस्पताल में जिंदगी की जंग जीतने के बाद घर आया था नैश (Youtube/@GWR)
मेडिकल साइंस की दुनिया में चमत्कार से कम नहीं है यह घटना
नैश की मां मोल्ली और पिता रैंडल पहले ही एक गर्भपात का दर्द झेल चुके थे। लेकिन जब नैश पैदा होने वाला था, तो डॉक्टरों ने उसके माता-पिता को साफतौर पर कह दिया था कि "इस बच्चे के जीवित रहने की संभावना बेहद कम ही है, और अगर बचा भी तो इसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होंगी।" लेकिन नैश की मां मोल्ली ने हार नहीं मानी। उसने लेबर को रोककर नैश का जन्म ठीक 21वें हफ्ते में करवाया और मेडिकल साइंस की सीमाओं को चुनौती दे डाली।
जीत ली जिंदगी की जंग
नैश ने अपने जन्म के बाद नवजात गहन देखभाल इकाई (NICU) में पूरे छह महीने बिताए। यहां पर वह हर पल जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। माता-पिता का अटूट विश्वास और मेडिकल टीम की मेहनत ने नैश को इस लड़ाई में जीतने लायक बनाया, और आखिरकार नैश ने अपनी जिंदगी की जंग को जीत ही लिया। इस वक्त नैश एक साल से भी ज्यादा का हो चुका है। उसकी प्यारी आंखें और मुस्कुराहट दुनिया को बता रही हैं कि जिंदगी को कभी कमजोर न समझें।
6 महीने तक लड़ी जिंदगी की जंग
6 महीने तक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने और उसे जीतने के बाद नैश जनवरी 2025 में अपने घर आया। माता-पिता की गोद में नैश का चेहरा खुशी से चमक रहा था। हालांकि नैश को अभी भी ऑक्सीजन सपोर्ट और फीडिंग ट्यूब की जरूरत पड़ती है। उसके दिल में एक छोटा सा छेद भी है, लेकिन यह कोई ज्यादा चिंता का विषय नहीं है। इसे लेकर डॉक्टरों का कहना है कि यह समय के साथ ठीक हो सकता है। फिलहाल नैश चलता तो नहीं है, लेकिन वह अपने बिस्तर पर करवट लेता है और खुद को खड़ा करने की कोशिश करता है। नैश के चेहरे की हर मुस्कान उम्मीद बिखेरती है और लोगों को यह एहसास दिलाती है कि मुश्किल हालातों में भी उम्मीद का दामन थामे रखें। जिंदगी हमेशा सबको दूसरा मौका देती है। बस विश्वास बनाए रखिए।
