Ajab Gajab: विश्व में अजब-गजब आदतों वाले एक से बढ़कर एक नमूने भरे पड़े हैं। ऐसा ही एक नमूना ग्रीस में पाया गया है। यहां पर 28 वर्षीय व्यक्ति को एक महीने की जेल की सजा सुनाई गई और उसे अपने अजीबोगरीब व्यवहार के लिए थेरेपी से गुजरने का आदेश दिया गया। शख्स पर आरोप था कि, वो अपने पड़ोसी के घर में घुसता था और फिर चोरी-छिपे उनके जूते सूंघता था। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, थेसालोनिकी के ऐसे लक्षण वाले शख्स को आमतौर पर 'फुट फेटिश' कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें व्यक्ति को पैरों या जूतों से आनंद अथवा उत्तेजना मिलती है। दावा है कि, उस शख्स ने इन लक्षणों के बावजूद किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया मगर उसकी आदतों से पड़ोसियों को डर लगता है। यही वजह है शख्स के पड़ोसियों को कानून का सहारा लेना पड़ा।
छह महीने में तीसरी बार हुई घटना
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, यह घटना उत्तरी ग्रीस के एक शहर सिंडोस में 8 अक्टूबर को हुई थी। यहां वो व्यक्ति पड़ोसियों ने घर के बाहर हवा में सूख रहे जूतों को सूंघते हुए पकड़ा गया। कहा जा रहा है कि, उसकी अजीब हरकतें पड़ोसियों के लिए यह बिल्कुल नई नहीं थीं। छह महीने में यह तीसरी बार था जब उसे इस अजीबोगरीब हरकत में पकड़ा गया था। हर बार, चोरी करने या नुकसान पहुंचाने के लिए घर में घुसने के बजाय वह व्यक्ति सिर्फ जूते सूंघने के उद्देश्य से घर में घुसता था, जिससे उसके पड़ोसी भ्रमित और चिंतित हो जाते थे। पड़ोसियों ने कहा कि उस व्यक्ति ने कभी भी उनको कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और न ही कोई हिंसका व्यवहार दिखाया। मगर उसका ऐसा व्यवहार उन्हें डराता है। जिस कारण उन्हें (पड़ोसियों) अधिकारियों की मदद की जरूरत पड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, शख्स के परिवार को उसकी अजीबोगरीब आदत के बारे में पता था, लेकिन वे उसे ऐसा करने से रोक नहीं पाते थे।
अपनी आदत पर शख्स बोला
'मैं खुद नहीं जानता हूं कि, मैं जूतों की ओर क्यों आकर्षित हुआ। इस व्यवहार ने मुझे कई मौकों पर शर्मिंदा किया। हालांकि किसी को नुकसान पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नहीं था।' ये बातें शख्स ने कोर्ट द्वारा पूछे गए सवाल में कहीं। गौरतलब है कि, उसकी कामुकता जिसे एक मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें कोई व्यक्ति पैरों या पैरों से संबंधित वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आकर्षित होता है। इस मामले पर थेसालोनिकी अदालत ने शख्स को एक महीने की जेल और अनिवार्य मेडिकल थेरेपी के लिए भेज दिया।
(डिस्क्लेमर: टाइम्स नाउ नवभारत इन वायरल दावों की पुष्टि नहीं करता है।)
