हम सभी अपने घरों में सोना और चांदी खरीदते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि सोने की शुद्धता को हमेशा 'कैरेट' में क्यों मापा जाता है, जबकि चांदी को ज्यादातर 'किलो' या प्रतिशत में तौला और बेचा जाता है? यह दोनों कीमती धातुएं हैं, फिर भी इनकी खरीद-बिक्री के नियम और मापन की परंपराएं बिल्कुल अलग हैं। अक्सर लोग इसमें भ्रमित हो जाते हैं कि इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) के गणित को लेकर कन्फ्यूज्ड हैं, तो यह खबर आपके लिए है। इसके पीछे इतिहास, व्यापार के तरीके और इन धातुओं की अपनी प्रकृति का बड़ा हाथ है। आइए जानते हैं इनके पीछे का कारण...
सोना अपनी अद्भुत चमक और लचीलेपन के लिए जाना जाता है। इसकी शुद्धता मापने के लिए 'कैरेट' (Karat) प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जो वास्तव में शुद्धता का एक पैमाना है। इस सिस्टम में सोने को 24 भागों के पैमाने पर परखा जाता है। 24 कैरेट सोना 99.9 प्रतिशत शुद्ध होता है, लेकिन यह इतना नरम होता है कि इससे आभूषण नहीं बनाए जा सकते। गहने बनाने के लिए इसमें तांबा, चांदी या जस्ता जैसी अन्य धातुएं मिलानी पड़ती हैं। कैरेट प्रणाली हमें स्पष्ट रूप से बताती है कि 24 भागों में से कितने भाग शुद्ध सोना है। उदाहरण के लिए, 22 कैरेट सोने का मतलब है कि उसमें 22 भाग शुद्ध सोना है और बाकी 2 भाग अन्य धातुएं हैं। यही कारण है कि ज्वेलरी इंडस्ट्री में कैरेट प्रणाली को इंटरनेशनल मानकों के अनुरूप मिश्र धातु का अनुपात स्पष्ट करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
'टंच' से फाइननेस तक का सफर
दूसरी ओर, चांदी का मापन बिल्कुल अलग तरीके से होता है। भारत में पारंपरिक रूप से चांदी की शुद्धता को 'टंच' कहा जाता है, जो सीधे-सीधे प्रतिशत को दर्शाता है। अगर कोई कहता है कि चांदी 99.9 टंच की है, तो इसका मतलब है कि वह 99.9 प्रतिशत शुद्ध है। वहीं, आभूषणों के लिए 92.5 टंच या स्टर्लिंग सिल्वर सबसे आम है। चूंकि चांदी सोने की तुलना में अधिक कठोर और स्थिर होती है, इसलिए इसकी शुद्धता को सीधे प्रतिशत में बताना आसान और प्रचलित रहा है। आधुनिक समय में, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) जैसी संस्थाएं 'फाइननेस मार्किंग' का उपयोग करती हैं, जैसे कि 999 (शुद्ध चांदी) या 925 (गहनों के लिए), जो पूरी दुनिया में स्वीकार्य है।
चांदी किलो में क्यों?
चांदी को अक्सर किलो में बेचने और खरीदने के पीछे मुख्य कारण इसका उपयोग और मूल्य है। सोने की तुलना में चांदी सस्ती है, इसलिए निवेश (Investment) के रूप में इसे अक्सर बार (Bars) या सिल्लियों के रूप में भारी मात्रा में खरीदा जाता है, जहां शुद्धता से ज्यादा वजन (Weight) का महत्व होता है। दुनिया भर के बड़े कमोडिटी बाजारों में चांदी किलो या ट्रॉय औंस (Troy Ounce) में ट्रेड होती है। एशिया में किलो यूनिट बहुत लोकप्रिय है, जबकि पश्चिमी देशों में ट्रॉय औंस का चलन ज्यादा है। इंटरनेशनल स्तर पर लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) द्वारा मान्यता प्राप्त चांदी के बार 1000 ट्रॉय औंस के होते हैं और यही अंतरराष्ट्रीय कीमतों को निर्धारित करते हैं।


