इन छोटी-छोटी गलतियों की वजह से आयुष्मान कार्ड हो सकता है रिजेक्ट, हमेशा ध्यान रखें ये बातें

यदि आप भी आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन करने जा रहे हैं, या आपका कार्ड बार-बार रिजेक्ट हो रहा है, तो आपको कुछ बड़ी गलतियों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए जिनकी वजह से ऐसा होता है।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत देश के करोड़ों लोगों को हर साल 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। लेकिन हाल ही में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) और राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा नियमों को सख्त किए जाने के बाद, कई लोगों के आयुष्मान कार्ड आवेदन रिजेक्ट (खारिज) हो रहे हैं। यदि आप भी आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन करने जा रहे हैं, या आपका कार्ड बार-बार रिजेक्ट हो रहा है, तो आपको कुछ बड़ी गलतियों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए जिनकी वजह से ऐसा होता है।

Ayushman card (11)

आपकी छोटी-छोटी गलतियों की वजह से आयुष्मान कार्ड रिजेक्ट हो जाता है।

इन गलतियों के कारण रिजेक्ट होता है आयुष्मान कार्ड

आयुष्मान कार्ड रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह 'सोर्स डेटा' (यानी सरकारी रिकॉर्ड/राशन कार्ड/समग्र आईडी) और आपके 'आधार कार्ड' के बीच की जानकारियां मैच न होना है। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के मुताबिक निम्नलिखित गलतियों से बचना बेहद जरूरी है:

नाम और पिता के नाम की स्पेलिंग में अंतर

सबसे ज्यादा आवेदन इसी वजह से रिजेक्ट होते हैं। अगर आपके आधार कार्ड में पिता का नाम या आपका खुद का नाम अलग स्पेलिंग के साथ लिखा है, और सरकारी राशन कार्ड/सोर्स लिस्ट में वह अलग है, तो सिस्टम उसे फर्जी मानकर रिजेक्ट कर देता है। नाम में एक सिंगल अक्षर (Letter) की भी गलती नहीं होनी चाहिए।

जन्मतिथि (Date of Birth) अलग होना

अगर आपके आधार कार्ड में जन्मतिथि कुछ और है और आयुष्मान पोर्टल के रिकॉर्ड में कुछ और, तो आपका कार्ड कभी अप्रूव नहीं होगा। आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि दोनों जगह दिन, महीना और साल (DD-MM-YYYY) बिल्कुल एक समान हों।

जेंडर यानी लिंग की गड़बड़ी

कई मामलों में यह देखा गया है कि आधार कार्ड में लिंग के कॉलम में 'महिला' (Female) दर्ज होता है, लेकिन आयुष्मान कार्ड का फॉर्म भरते समय या पोर्टल पर गलती से 'पुरुष' (Male) सिलेक्ट हो जाता है। ऐसी तकनीकी और मानवीय गलतियों पर आवेदन को तुरंत निरस्त कर दिया जाता है।

पते में बड़ा अंतर होना

यदि आपके आधार कार्ड पर उत्तर प्रदेश का पता दर्ज है और आप किसी अन्य राज्य के सोर्स डेटा के जरिए कार्ड बनवाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपका आवेदन खारिज हो जाएगा। दोनों दस्तावेजों में जिला और राज्य का रिकॉर्ड मेल खाना चाहिए।

अधूरी ई-केवाईसी या डुप्लीकेट आवेदन

अधूरी केवाईसी: अगर आपने अपना फिंगरप्रिंट या आधार ओटीपी वेरिफिकेशन (e-KYC) सही ढंग से पूरा नहीं किया है, तो कार्ड पेंडिंग में जाकर रिजेक्ट हो जाता है।

डुप्लीकेट कार्ड: यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से दो अलग-अलग परिवारों के डेटा में दर्ज है और वह दोनों जगह से कार्ड बनाने की कोशिश करता है, तो सिस्टम सुरक्षा कारणों से उसे ब्लॉक या डिसेबल कर देता है।

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