Fastag vs GNSS: क्या अब खत्म हो जाएगी Fastag की जरूरत, कैसे काम करेगा सैटेलाइट वाला टोल सिस्टम

  • Edited by: Rohit Ojha
  • Updated Jul 26, 2024, 02:36 PM IST

Fastag vs GNSS: इस सिस्टम का उद्देश्य टोल कलेक्शन की एफिशिएंसी को बढ़ाना और टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ को कम करना है। फास्टैग आरएफआईडी तकनीक का उपयोग करता है जिसमें विंडशील्ड स्टिकर होता है जिसे टोल बूथ स्कैनर ऑटोमैटिक रूप से टोल काटने के लिए रीड हैं।

Fastag vs GNSS: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय चुनिंदा नेशनल हाइवे पर ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में इस बारे में बताया। उन्होंने बताया कि यह टोल केलक्शन सिस्टम मौजूदा फास्टैग सिस्टम के साथ-साथ करेगा। कर्नाटक में NH-275 के बेंगलुरु-मैसूर सेक्शन और हरियाणा में NH-709 के पानीपत-हिसार सेक्शन पर पायलट स्टडीज पहले किए जा चुके हैं।

FASTag

फास्टटैग के साथ अब GNSS चलेगा

टोल प्लाजा पर भीड़ होगी कम

इस सिस्टम का उद्देश्य टोल कलेक्शन की एफिशिएंसी को बढ़ाना और टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ को कम करना है। 25 जून, 2024 को GNSS-आधारित टोल पर हितधारकों से सलाह करने के लिए एक इंटरनेशनल वर्कशॉप आयोजित की गई थी। इसके बाद 7 जून, 2024 को ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी की गई। इसमें व्यापक औद्योगिक भागीदारी को आमंत्रित किया गया। ईओआई प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई, 2024 थी।

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