Deodorant vs Perfume: गर्मी के मौसम में परफ्यूम और डियोडरेंट का इस्तेमाल बढ़ जाता है। लोग पसीने की बदबू से निजात पाने के लिए यूज करते हैं। आमतौर पर परफ्यूम और डियोडरेंट का इस्तेमाल पार्टी, ऑफिस और समान्य दिनों में भी करते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को ही इस बारे में पता होता है कि परफ्यूम और डियोडरेंट दोनों अलग-अलग होते हैं। ये दोनों ही अलग-अलग प्रोडक्ट हैं। इसलिए अब जब भी आप परफ्यूम और डियोडरेंट खरीदने जाएं, तो सबसे पहले दोनों के अंतर को समझकर ही खरीदारी करें।
परफ्यूम और डियोडरेंट में बड़ा अंतर
परफ्यूम और डियोडरेंट में बड़ा अंतर खुशबू का है। परफ्यूम में परफ्यूम एसेंस फीसदी तक होता है, जिसकी वजह से इसकी खुशबू अधिक देर तक बरकरार रहती है। वहीं, डियोडरेंट में परफ्यूम एसेंस की मात्रा 1-2 फीसदी के बीच होती है। अब चूंकि परफ्यूम में परफ्यूम एसेंस अधिक होता है, तो यह डियोडरेंट के मुकाबले हार्ड होता है। परफ्यूम की खुशबू करीब 12 घंटे तक बरकरार रहती है, लेकिन डियोडरेंट की फ्रेगनेन्स 4 घंटे तक ही बरकरार रहती है।
पसीने में कौन कारगर
डियोडरेंट पसीने में बेहद ही कारगर साबित होता है। क्योंकि इसमें एंटी-पर्सपरेंट नाम का पदार्थ होता है। यह शरीर के पसीने को सोखता है और स्किन को चिपचिपा होने से रोकता है। लेकिन परफ्यूम में सिर्फ खुशबू होती है। यह सिर्फ पसीने के बदबू को दूर कर सकता है।
कीमत में फर्क
डियोडरेंट और परफ्यूम की कीमतों में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। डियोडरेंट कम दाम पर भी मार्केट में आसानी से मिल जाता है। लेकिन परफ्यूम महंगा होता है। बड़े ब्रॉन्ड के परफ्यूम की कीमत काफी अधिक होती है। परफ्यूम हमेशा बालों और कपड़ों पर ही लगना चाहिए, क्योंकि इसमें बड़ी मात्रा में कॉन्संट्रेट रहता है। इसकी वजह से डायरेक्ट स्किन पर स्प्रे करना नुकसान पहुंचा सकता है। डियोडरेंट में न्संट्रेशन की मात्रा कम होती है।
