Car Colour Change Procedure: क्या आपको भी अपनी कार को मॉडिफाई करने का शौक है? अगर हां तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है। हर व्यक्ति को अपनी कार से काफी प्यार होता है और अक्सर हम अपनी कार में अन्य मॉडिफिकेशन्स के साथ-साथ कार के कलर को बदलने के बारे में भी सोचते हैं। कार के कलर को बदलने के लिए कुछ जरुरी नियमों एवं शर्तों को पूरा करना पड़ता है। कार की मॉडिफिकेशन से संबंधित सभी नियम मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्शन 52 के अंतर्गत आते हैं। आइये जानते हैं कार के कलर को बदलने के लिए आपको किन कानूनी शर्तों को पूरा करना पड़ता है?
क्या आपको अपनी कार का कलर बदलवाना है? जानिये जरूरी नियम एवं कानून
ड्यूल टोन कारों के लिए
अगर आपकी कार ड्यूल टोन कलर में है और आप अपनी कार को इन दो रंगों में से ही किसी एक रंग में पूरी तरह रंगना चाहते हैं तो आपको किसी कानूनी प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको दूसरे वाले रंग का कुछ हिस्सा अपनी कार में रखना पड़ेगा। मान लीजिये कि आपके पास व्हाईट और ब्लैक ड्यूल कलर की कार है और आप इस कार को पूरी तरह व्हाईट रंग में बदलना चाहते हैं तो आपको कुछ हिस्सा ब्लैक रखना पड़ेगा।
अलग रंग के लिए अलग नियम
अगर आप अपनी कार को किसी अन्य कलर में बदलना चाहते हैं तो इसके लिए आपको मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्शन 52 के तहत इस प्रक्रिया का पालन करना होगा:
NAMV फॉर्म भरें: सबसे पहले आपको इंटरनेट से डाउनलोड करके या फिर RTO से प्राप्त कर NAMV फॉर्म भरना होगा। इस फॉर्म को भरने में RTO के अधिकारियों की सहायता ले सकते हैं।
RTO में जमा करें फॉर्म: इसके बाद अपने संबंधित RTO ऑफिस में जाकर फॉर्म जमा करवा दें और सर्विस चार्ज की पेमेंट भी कर दें। इसके बाद आपको अपने RTO से अनुमति मिलने का इंतजार करना है।
फिर से लगेगा RTO का चक्कर: गाड़ी का रंग बदलवाने के बाद आपको एक बार फिर RTO जाना होगा। अबकी बार अपनी गाड़ी की RC भी लेकर जाएं क्योंकि इसमें बदलाव किये जाएंगे।
इंश्योरेंस कंपनी: अपनी इंश्योरेंस कंपनी को अपनी गाड़ी के नए कलर के बारे में बताना ना भूलें यह बहुत जरूरी है। अगर आप इंश्योरेंस कंपनी को कार के बदले हुए कलर के बारे में बताना भूल जाते हैं तो आप पर पेनल्टी भी लगाई जा सकती है।
