भारत ने पिछले कुछ सालों में डिजिटल पेमेंट की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। अब ज्यादातर लोग आनलाइन माध्यम से ही छोटे-बड़े पेमेंट करते हैं। अगर आप भी अपने डेली रूटीन लाइफ में यूपीआई (UPI) से बड़ा पेमेंट करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। सरकार एक बार फिर से UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) दोबारा लागू कर सकती है। जानकारी के अनुसार यह 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.5% तक का MDR लागू हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस पर आखिरी फैसला अगले एक महीने के भीतर लिया जा सकता है।
सरकार एक बार फिर से लागू कर सकती है MDR सिस्टम। (फोटो क्रेडिट-iStock)
छोटे व्यापारियों को मिलेगी राहत
सरकार की योजना के मुताबिक, जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर ₹1.5 करोड़ तक है, उन्हें MDR नहीं देना होगा, चाहे UPI भुगतान की राशि कितनी भी हो। सरकार का मानना है कि बड़े व्यापारी इस अतिरिक्त खर्च को आसानी से संभाल सकते हैं, जबकि छोटे दुकानदारों पर इसका बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
MDR क्या होता है?
MDR (Merchant Discount Rate) वह सर्विस चार्ज है, जो किसी दुकान या व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक या पेमेंट सेवा देने वाली कंपनी को देना पड़ता है।
कितने लेनदेन होंगे प्रभावित?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ₹2,000 या उससे अधिक के UPI भुगतान कुल Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन का केवल 4% हैं। मौजूदा समय में करीब 86% UPI भुगतान ₹500 तक के होते हैं। वहीं करीब 10% ऑनलाइन पेमेंट ₹501 से ₹2,000 के बीच होते हैं। करीब 4% भुगतान ₹2,000 से अधिक के होते हैं। इसलिए सरकार का मानना है कि इस फैसले का आम लोगों और छोटे व्यापारियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
2020 में हटाया गया था MDR
सरकार ने जनवरी 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR खत्म कर दिया था, ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिले। इससे पहले UPI और RuPay पर 1% से कम MDR लिया जाता था। हालांकि, आज भी अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगता है।
- क्रेडिट कार्ड: लगभग 2% MDR
- गैर-RuPay डेबिट कार्ड: लगभग 0.9% MDR
सरकार क्यों ला रही है यह बदलाव?
MDR हटने के बाद सरकार UPI के ₹2,000 से कम के लेनदेन पर 0.15% प्रोत्साहन राशि (Incentive) देती है। लेकिन Payments Council of India (PCI) का कहना है कि यह राशि डिजिटल पेमेंट सिस्टम की बढ़ती लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने भी संसद की एक समिति को बताया था कि सरकारी प्रोत्साहन से उद्योग की कुल लागत का केवल 11% और संभावित MDR आय का करीब 14% ही पूरा हो पाता है।
UPI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल
इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ने के बाद डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में भी काफी प्रगति देखने को मिली है। अब लगभग हर एक स्मार्टफोन यूजर के पास डिजिटल पेमेंट करने की व्यवस्था मौजूद है। पिछले 10 वर्षों में UPI भारत का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म बन चुका है। आज डिजिटल पेमेंट कितनी बड़ी आवश्यकता बन चुका है इसका अंदाजा आप पिछले कुछ सालों में हुए ऑनलाइन पेमेंट से लगा सकते हैं। FY17 में 2 करोड़ (20 मिलियन) ट्रांजैक्शन हुए थे लेकिन FY26 में 241.62 अरब (बिलियन) ट्रांजैक्शन देखने को मिले। वहीं, लेनदेन का कुल मूल्य ₹7,000 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹314 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
