Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट पर बोले चीफ जस्टिस- मोबाइल को दीवार पर दे मारिए, गिरफ्तारी अपने आप खत्म, पढ़े-लिखे लोग कैसे बन रहे शिकार?

Digital Arrest: सुप्रीम कोर्ट ने पढ़े-लिखे लोगों द्वारा 'डिजिटल अरेस्ट' का शिकार होने पर हैरानी जताई है। अदालत ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले बैंकों को पीड़ितों को मुआवजा देना चाहिए और कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा।

Digital Arrest : सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश में तेजी से बढ़ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों पर गहरी चिंता और हैरानी जताई है। अदालत ने कहा कि आज के समय में जब हर तरफ जन जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, समाचारों में चेतावनियां छप रही हैं और अदालतें भी लगातार निर्देश दे रही हैं, तब भी पढ़े-लिखे और समझदार लोग मोबाइल फोन पर फर्जी गिरफ्तारी के नाम पर हो रही ठगी का शिकार कैसे बन रहे हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आखिर लोगों को क्या हो गया है कि वे इस तरह आसानी से जाल में फंस जाते हैं।

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पढ़े-लिखे लोग भी कैसे बन रहे हैं 'डिजिटल अरेस्ट' के शिकार? सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी और गहरी चिंता

"मोबाइल को दीवार पर मार दीजिए, गिरफ्तारी खत्म"

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबकि चीफ जस्टिस ने बेहद सख्त और स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्या लोग इतनी सी बुनियादी बात भी नहीं समझ पा रहे हैं कि मोबाइल फोन पर कभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई फोन पर कहे कि वह गिरफ्तार है, तो उस मोबाइल को दीवार पर दे मारिए, गिरफ्तारी अपने आप खत्म हो जाएगी। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देश में अगर किसी नागरिक को यह लगने लगे कि उसकी मोबाइल फोन पर गिरफ्तारी हो रही है, तो यह वाकई सोचने का विषय है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर इस उम्र में समझदार और पढ़े-लिखे लोग ठगी का शिकार बनेंगे, तो वे अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या सिखाएंगे। कोई भी व्यक्ति यह आसानी से जांच सकता है कि उसके खिलाफ अदालत का कोई असली आदेश है या नहीं।

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