फैमिली के साथ किसी अच्छे रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद जब हाथ में बिल आता है, तो खाने की कीमत और GST के अलावा एक और चीज ध्यान खींचती है—सर्विस चार्ज (Service Charge)। अक्सर यह बिल का 5 से 10% तक होता है, जिससे जेब पर अच्छा-खासा असर पड़ता है। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इस चार्ज को चुकाना कानूनी रूप से जरूरी है? आइए बेहद आसान शब्दों में समझते हैं कि सरकार के नियम इस बारे में क्या कहते हैं।
सर्विस चार्ज देना आपकी मर्जी पर डिपेंड करता है। (फोटो क्रेडिट-iStock)
भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) के नियमों के मुताबिक, सर्विस चार्ज देना पूरी तरह से आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। यह कोई सरकारी टैक्स नहीं है, बल्कि एक तरह की 'टिप' है। अगर आपको रेस्टोरेंट की सर्विस या खाना पसंद नहीं आया, तो आप इसे देने से साफ मना कर सकते हैं।
बिना पूछे बिल में जोड़ना है गलत
कोई भी होटल या रेस्टोरेंट आपकी अनुमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता। नियमों के तहत उन्हें अपने मेन्यू कार्ड या डिस्प्ले बोर्ड पर साफ लिखना होगा कि सर्विस चार्ज पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है। जबरदस्ती बिल में इसे शामिल करना कानूनन गलत व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना जाता है।
जबरदस्ती वसूलने पर यहां करें शिकायत
अगर कोई रेस्टोरेंट आपके मना करने के बाद भी बिल से सर्विस चार्ज हटाने को तैयार नहीं होता है, तो आप चुप न बैठें। आप इन तरीकों से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन: आप सीधे 1915 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- ऑनलाइन माध्यम: आप उनके आधिकारिक ऐप या पोर्टल पर जाकर शिकायत कर सकते हैं।
- कंज्यूमर फोरम: आप जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- ऑर्डर देने से पहले देखें: रेस्टोरेंट में बैठते ही मेन्यू कार्ड पर लिखी नियम-शर्तें ध्यान से पढ़ें या वेटर से पहले ही पूछ लें।
- बिल चेक करें: खाना खाने के बाद बिल को ध्यान से देखें। अगर उसमें सर्विस चार्ज जुड़ा है, तो आप मैनेजर से उसे हटाने को कह सकते हैं।
- वेटर को सीधी टिप: आप चाहें तो सर्विस चार्ज हटवाकर अपनी मर्जी से सीधे वेटर को नकद (Cash) टिप दे सकते हैं।
