बिहार में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब राशन कार्डधारकों को राशन दुकानों के जरिए कोयला उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि खाना पकाने में आ रही दिक्कतों को कम किया जा सके। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर घरेलू गैस सिलेंडर की उपलब्धता पर भी देखने को मिल रहा है।
बिहार में राशन दुकानों पर मिलेगा कोयला, गैस संकट से निपटने के लिए सरकार का बड़ा फैसला
हर परिवार को मिलेगा एक क्विंटल कोयला
सरकार के फैसले के अनुसार, राशन कार्ड रखने वाले प्रत्येक परिवार को हर महीने करीब 100 किलोग्राम यानी एक क्विंटल कोयला दिया जाएगा। यह व्यवस्था फिलहाल केवल उन्हीं लोगों के लिए लागू होगी जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आते हैं। जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनके लिए अभी कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
युद्ध का असर, गैस सप्लाई पर पड़ा दबाव
राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका असर भारत के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर की उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए कोयले को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
तैयार की गई पूरी सप्लाई चेन
सरकार ने कोल हेड से लेकर राशन दुकानों तक कोयला पहुंचाने के लिए पूरी सप्लाई व्यवस्था तैयार कर ली है। इस प्रक्रिया में राज्य की खनन एजेंसी को प्रमुख भूमिका दी गई है, जो कोल इंडिया से कोयले की मांग करेगी। इसके बाद थोक विक्रेताओं के माध्यम से कोयला जिला मुख्यालयों तक पहुंचेगा और फिर वहां से जनवितरण प्रणाली के जरिए राशन दुकानों तक सप्लाई की जाएगी।
वितरण और लागत का तय होगा ढांचा
कोयले की सप्लाई के लिए थोक विक्रेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी, जिनसे एक निश्चित हैंडलिंग चार्ज लिया जाएगा। वहीं, संबंधित एजेंसी को भी एक तय प्रतिशत मार्जिन दिया जाएगा। जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित की गई है, जो कोयले के परिवहन, भाड़े और वितरण से जुड़ी दरों को तय करेगी।
आपदा प्रबंधन कानून के तहत लागू व्यवस्था
सरकार ने इस योजना को आपदा प्रबंधन कानून-2005 के तहत लागू करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य संकट की स्थिति में आम लोगों को राहत देना है, ताकि वे खाना पकाने जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकें।
राहत के साथ नई चुनौती भी
सरकार का यह कदम जहां गैस संकट से राहत देने की कोशिश है, वहीं कोयले के इस्तेमाल से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल, सरकार का फोकस लोगों को तत्काल राहत देने पर है, ताकि ऊर्जा संकट के बीच किसी को परेशानी न हो।
