Rail Facts: क्या होता है रेल में लगाया गया fog safe device, धुंध में होने वाली दुर्घटना से कैसे करता है अलर्ट

  • Authored by: आदित्य सिंह
  • Updated Dec 7, 2022, 06:59 PM IST

how fog save device Work In Railways: सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ ही ट्रेन के लेट लतीफ होना शुरू हो जाता है। हालांकि भारतीय रेलवे इस समस्या से निपटने के लिए एक के बाद एक कदम उठा रही है। रेलवे ने ट्रेनों में फॉग सेव डिवाइस लगा दिया है। यह ना केवल ट्रेन के हादसों को रोकेने में कामयाब होगी बल्कि ट्रेन को लेट लतीफ होने से भी बचाएगी।

KEY HIGHLIGHTS
  • अब घने कोहरे में भी नहीं कम होगी ट्रेन की रफ्तार।
  • ट्रेनों में लगे हैं फॉग सेव डिवाइस।
  • यह लोकोपायलट को आने वाले सिग्नल्स और क्रॉसिंग की देता है जानकारी।

Fog Safe Device In Railways: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड समेत भारत के अन्य राज्यों में ठंड ने दस्तक दे दिया है। वहीं कोहरे का असर भी अब साफ देखने को मिल रहा है। धुंध का असर ना केवल लोगों पर और यातायात साधन पर पड़ता है बल्कि इसका असर ट्रेनों (Railway) पर भी देखा जाता है। यही कारण है कि सर्दियों में ट्रेन हादसे बढ़ने लगते हैं। लेकिन आपको बता दें अब रेलवे को तीसरी आंख मिल (Fog Safety Device) गई है। जी हां यह ना केवल ट्रेन के हादसों को रोकेने में कामयाब होगी बल्कि ट्रेन को लेट लतीफ होने से भी बचाएगी। दरअसल रेलवे एक ऐसा तकनीक इस्तेमाल कर रहा है, जो कोहरे में भी आगे के रास्ते की जानकारी देता है यानी आगे सिग्नल है, या रेलवे ब्रिज लोकोपायलट को जीपीएस के जरिए सबकुछ पता चल जाता है। इस डिवाइस का नाम है रेलवे फॉग डिवाइस। इससे लोको पायलट को ट्रेन चलाने में काफी मदद मिलती है।

बता दें यह एक बैटरी ऑपरेटेड डिवाइस होता है, जिसे ट्रेन के इंजन में रखा जाता है। इसमें जीपीएस की सुविधा भी मौजूद होती है। इस डिवाइस में एंटीना लगा होता है, जिसे ट्रेन के इंजन के आगे लगा दिया जाता है। यह एंटीना आगे की लोकेशन को कैच करता है। साथ ही लोकोपायलट को खतरनाक जोन से अवगत करवाता है और आने वाले सिग्नल के बारे में बताता है। इस डिवाइस में एक चिप लगा होता है, जिसमें रेलवे के संबंधित रूट का डाटा इंस्टॉल होता है। इसमें रेलवे के रूट में पड़ने वाले सिग्नल, रेलवे स्टेशन, हॉल्ट और जंक्शन की पूरी जानकारी होती है।

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