टल गए अमेरिकी और यूरोपीय साइज पहनने के दिन, अब ‘भा’ कोड से बनेंगे आपके जूते

भारत में मिलने वाले फुटवियर अमेरिकी और यूरोपीय नाप के हिसाब से तैयार किए जाते हैं। जबकि भारतीय लोगों के पैर अमेरिकी या फिर यूरोपीय लोगों के मुकाबले ज्यादा चौड़े हैं। इसी वजह से कभी-कभी हमें जूते या चप्पल सही से फिट नहीं आते हैं। लेकिन जल्द ही यह स्थिति बदलने वाली है। जूते-चप्पल बनाने वाली कंपनियां अब भारतीय लोगों के लिए ‘भा (Bha)’ कोड के आधार पर फुटवियर तैयार करेंगी

What Is Bha Code: कई बार ऐसा होता है कि हम अपने लिए जो जूता या चप्पल पसंद करते हैं वह हमें फिट नहीं आता। जूते-चप्पल बनाने वाली कंपनियां वैश्विक पैमानों के अनुसार फुटवियर तैयार करती हैं। भारत में मिलने वाले फुटवियर्स को अमेरिकी या फिर यूरोपीय मानकों के आधार पर तैयार किया जाता है। जबकि भारतीय लोगों के पैर अमेरिकी या यूरोपीय लोगों के मुकाबले ज्यादा चौड़े होते हैं। इसकी वजह से कभी-कभी हमारे पसंदीदा जूते और चप्पल हमारे पैरों में फिट नहीं आते हैं। लेकिन अब जल्द ही जूते के साइज के मानकों की यह व्यवस्था बदलने वाली है। भारतीय लोगों के लिए अलग से जूतों का एक साइज तैयार किया जा रहा है और अब फुटवियर बनाने वाली कंपनियां इसी आधार पर जूते-चप्पल तैयार करेंगी।

What Is Bha Code

क्या है भा कोड जिसके हिसाब से बनेंगे आपके जूते?

आ गया ‘भा (Bha)’ कोड

जूतों के अमेरिकी साइज को ‘US’ तो यूरोपीय साइज को ‘EU’ से दर्शाया जाता है। इसी तरह भारतीय फुटवियर साइज को ‘ भा (Bha)’ से दर्शाया जाएगा। फिलहाल ‘भा’ कोड को भारतीय स्टैण्डर्ड ब्यूरो (BIS) से मंजूरी का इंतजार है। भारतीय लोगों के पैरों के साइज को समझने के लिए CSIR और केंद्रीय लेदर रिसर्च इंस्टिट्यूट ने पूरे भारत में सर्वे किया था। इस सर्वे में पता चला कि भारतीय महिलाओं के पैर 11 वर्ष की उम्र तक और पुरुषों के पैर 16 साल की उम्र तक बढ़ते हैं। 1 लाख से ज्यादा लोगों पर किये गए इस सर्वे के आधार पर ही ‘Bha’ कोड को तैयार किया जाएगा।

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