गर्मी के सीजन में घरों में कूलर, एसी, पंखे समेत कई सारे उपकरण एक साथ चलते हैं। अगर इनका इस्तेमाल न किया जाए तो गर्मी में रह पाना बेहद मुश्किल है। एसी और कूलर हमें भीषण गर्मी से राहत तो देते हैं लेकिन इनसे टेंशन भी बढ़ने लगती है। एसी, कूलर, फ्रिज ऑन रहने से बिजली का बिल रॉकेट की रफ्तार से बढ़ने लगता है। इन उपकरणों की वजह से महीने में हजारों का बिल आ जाता है। अगर आप बिजली बिल बढ़ने से परेशान है तो अब आपकी टेंशन खत्म होने वली है।
मार्केट में आपको कई तरह के सोलर पैनल के ऑप्शन मिल जाते हैं।(फोटो क्रेडिट-iStock)
बढ़े हुए बिजली बिल से छुटकारा पाने का सबसे आसान तरीका है कि आप अपने घर में सोलर पैनल लगवा ले। सोलर पैनल आपको कई तरह से राहत देने वाला है। आपको बिजली की खपत से छुटकारा मिल जाएगा और साथ ही बिजली कटौती होने पर भी आप धड़ल्ले से एसी, कूलर और पंखा इस्तेमाल कर पाएंगे। आजकल हर कोई अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने की सोच रहा है। सरकार भी इस पर भारी सब्सिडी दे रही है। लेकिन जब लोग बाजार में सोलर पैनल खरीदने जाते हैं, तो कई तरह के पैनल देखकर उलझन में पड़ जाते हैं।
अगर आप भी इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि सोलर पैनल कितने तरह के होते हैं और आपके घर के लिए सबसे ज्यादा बिजली बनाने वाला पैनल कौन सा है, तो यह आर्टिकल आपके बड़े काम का है। आइए इसे बेहद आसान शब्दों में समझते हैं।
सोलर पैनल के प्रकार
- मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल
- पॉलीक्रिस्टलाइन सोलर पैनल
- थिन-फिल्म सोलर पैनल
मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल (Monocrystalline Solar Panels)
मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल सबसे एडवांस प्रीमियम कैटेगरी के सोलर पैनल है। गहरे काले रंग के दिखने वाले इन पैनलों को बनाने के लिए बिल्कुल शुद्ध सिलिकॉन का इस्तेमाल किया जाता है। अपनी इसी शुद्धता के कारण ये पैनल बेहद कारगर होते हैं और कम धूप या हल्के बादल वाले मौसम में भी बेहतरीन तरीके से काम करते हैं। हालांकि, बेहतरीन तकनीक और शुद्ध सिलिकॉन के इस्तेमाल की वजह से ये बाकी सोलर पैनलों की तुलना में काफी महंगे होते हैं, लेकिन कम जगह में सबसे ज्यादा बिजली बनाने के मामले में इनका कोई मुकाबला नहीं है।
पॉलीक्रिस्टलाइन सोलर पैनल (Polycrystalline Solar Panels)
दूसरी तरफ पॉलीक्रिस्टलाइन सोलर पैनल आते हैं, जो भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय और पारंपरिक विकल्प हैं। नीले रंग के दिखने वाले इन पैनलों को बनाने के लिए सिलिकॉन के कई क्रिस्टल्स को आपस में पिघलाया जाता है। ये मोनोक्रिस्टलाइन के मुकाबले काफी सस्ते होते हैं, जिससे बजट अनुकूल विकल्प चाहने वाले लोगों के लिए यह पहली पसंद बन जाते हैं। हालांकि, इनकी कार्यक्षमता थोड़ी कम होती है, जिसका सीधा मतलब है कि उतनी ही बिजली बनाने के लिए इन्हें छत पर मोनोक्रिस्टलाइन के मुकाबले ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है।
थिन-फिल्म सोलर पैनल (Thin-Film Solar Panels)
इनके अलावा एक तीसरी श्रेणी थिन-फिल्म सोलर पैनल की भी है। यह एक बेहद पतली और लचीली शीट जैसी तकनीक होती है, जिसे आसानी से मोड़ा जा सकता है। वजन में बहुत हल्के होने के कारण इन्हें बड़ी कमर्शियल इमारतों की घुमावदार दीवारों या फिर गाड़ियों की छतों पर लगाया जाता है। हालांकि, घरों के लिए ये बहुत ज्यादा उपयोगी नहीं माने जाते क्योंकि इनकी बिजली बनाने की क्षमता काफी कम होती है और इन्हें स्थापित करने के लिए बहुत बड़ी जगह की जरूरत पड़ती है।
इस सोलर पैनल में बनती है सबसे ज्यादा बिजली
अगर हम बिजली उत्पादन की बात करें, तो मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल सबसे ज्यादा बिजली बनाने के मामले में बादशाह माने जाते हैं। इनकी कार्यक्षमता लगभग 20% से 22% तक होती है, जो पॉलीक्रिस्टलाइन की 15% से 17% की क्षमता से कहीं अधिक है। आजकल मोनोक्रिस्टलाइन श्रेणी में ही बायफेशियल (Bifacial) तकनीक भी आ चुकी है, जो पैनल के आगे और पीछे दोनों तरफ से बिजली बनाती है। पीछे की तरफ से यह जमीन या फर्श से टकराकर वापस आने वाली रोशनी (अल्बीडो रिफ्लेक्शन) को सोखकर अतिरिक्त बिजली पैदा करती है।
यदि आपके घर की छत पर जगह कम है और आप कम समय में सबसे ज्यादा बिजली पैदा करना चाहते हैं, तो मोनोक्रिस्टलाइन पैनल में निवेश करना सबसे समझदारी भरा फैसला होगा। भले ही शुरुआत में इसमें थोड़ा ज्यादा खर्च आता है, लेकिन अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस से यह लंबे समय में आपके पैसों की पूरी वसूली कर देता है। वहीं, अगर आपके पास छत पर भरपूर जगह उपलब्ध है और आपका बजट सीमित है, तो पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल आपके लिए एक किफायती और व्यावहारिक सौदा साबित हो सकते हैं।
