Gratuity Calculation: जब भी आप किसी नई कंपनी में जॉइन करते हैं, तो आपके CTC (Cost to Company) में ग्रेच्युटी और EPF (Employees' Provident Fund) जैसी कई सुविधाएं जोड़ी जाती हैं। हालांकि, EPF की गणना समझना आसान है, लेकिन बहुत से लोगों को यह स्पष्ट नहीं होता कि ग्रेच्युटी को CTC में कैसे जोड़ा जाता है।
ऑफर लेटर में ग्रेच्युटी की गणना कैसे होती है
Payment of Gratuity Act, 1972 के तहत, कंपनियां कर्मचारियों को 5 साल या उससे अधिक की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी का भुगतान करती हैं।
ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का सही फॉर्मूला
EY India के टैक्स पार्टनर पुनीत गुप्ता के अनुसार, ग्रेच्युटी की गणना इस फॉर्मूला के आधार पर की जाती है:
(Last Drawn Monthly Wage × 15) ÷ 26। इस फॉर्मूले के मुताबिक, कर्मचारी को 15 दिनों की सैलरी के आधार पर ग्रेच्युटी दी जाती है। यहां नीचे हम उदाहरण भी दे रहे हैं।
उदाहरण से समझें ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन
अगर किसी कर्मचारी की वार्षिक बेसिक सैलरी ₹100 है, तो:
- मंथली बेसिक सैलरी = ₹100/12 = ₹8.33
- हर साल ग्रेच्युटी = ₹8.33 × (15/26) = ₹4.81
इसका मतलब, कर्मचारी के CTC का 4.81% हिस्सा ग्रेच्युटी के रूप में जोड़ा जाएगा।
CTC में ग्रेच्युटी का प्रभाव और संशोधन
HR प्रत्येक कर्मचारी के CTC में बेसिक सैलरी के 4.81% को ग्रेच्युटी के रूप में जोड़ता है। लेकिन यह प्रतिशत हर साल सैलरी रिवीजन के साथ बदल सकता है। Deloitte India की पार्टनर सरस्वती कस्तूरीरंगन कहती हैं, "कंपनियां साल-दर-साल ग्रेच्युटी की अनुमानित देनदारी का आकलन करती हैं। इसलिए, जैसे-जैसे बेसिक सैलरी बढ़ती है, वैसे-वैसे CTC में ग्रेच्युटी की राशि भी बढ़ती जाती है।"
