कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) के तहत पेंशन पाने वाले करीब हर दूसरे व्यक्ति को 1,500 रुपये प्रति माह से भी कम पेंशन मिल रही है। संसद में गुरुवार को पेश आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक कुल 81,48,490 पेंशनभोगियों में से 49,15,416 को इतनी कम पेंशन मिल रही थी।
पेंशन की न्यूनतम राशि बेहद कम (तस्वीर-istock)
सिर्फ 0.65% पेंशनभोगियों को 6,000 रुपये से अधिक पेंशन
आंकड़ों से यह भी सामने आया कि केवल 53,541 पेंशनभोगियों को ही 6,000 रुपये प्रति माह से अधिक पेंशन मिल रही है। यह संख्या कुल पेंशनभोगियों का मात्र 0.65 प्रतिशत है।
9,000 रुपये न्यूनतम पेंशन की मांग
श्रमिक संगठनों ने सरकार से ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर 9,000 रुपये करने की मांग की है। यह मांग श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को सौंपे गए 17-सूत्रीय मांग पत्र का हिस्सा है।
अभी न्यूनतम पेंशन सिर्फ 1000 रुपये
वर्तमान में ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम मासिक पेंशन केवल 1,000 रुपये निर्धारित है, जो पेंशनभोगियों की जीवन-यापन की जरुरतों को देखते हुए काफी कम मानी जा रही है।
पेंशन वितरण में बढ़ोतरी
न्यूज एजेंंसी भाषा के मुताबिक श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा को बताया कि पेंशन योजना के तहत वितरित कुल राशि 2022-23 में 22,112.83 करोड़ रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 23,027.93 करोड़ रुपये हो गई।
अधिकांश पेंशनभोगियों को 6,000 रुपये से कम पेंशन
आंकड़ों के अनुसार 4,000 रुपये से कम मासिक पेंशन पाने वालों की संख्या: 78,69,560 है। 6,000 रुपये से कम मासिक पेंशन पाने वालों की संख्या: 80,94,949 है।
निष्क्रिय खातों में बड़ी राशि
31 मार्च, 2025 तक निष्क्रिय खातों में कुल 10,898.07 करोड़ रुपये की राशि पड़ी हुई है, जो चिंता का विषय है। ईपीएस-95 योजना के आंकड़े पेंशनभोगियों की कठिन स्थिति को उजागर करते हैं। सरकार पर न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है, ताकि बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके।
