देश में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और तेज बनाने के लिए केंद्र सरकार एक नई व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दोपहिया (बाइक) एम्बुलेंस के लिए नया नियामकीय ढांचा प्रस्तावित किया है। इसका उद्देश्य उन इलाकों में मरीजों तक जल्दी पहुंचना है, जहां ट्रैफिक या संकरी सड़कों की वजह से सामान्य एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती।
अभी तक नहीं थे कोई राष्ट्रीय नियम/photo-AI
क्यों जरूरी है टू-व्हीलर एम्बुलेंस?
अक्सर बड़े शहरों में भारी ट्रैफिक और ग्रामीण क्षेत्रों में खराब या संकरी सड़कों के कारण एम्बुलेंस को मरीज तक पहुंचने में देरी हो जाती है। ऐसे में बाइक एम्बुलेंस कम समय में मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार दे सकती है और जरूरत पड़ने पर मरीज को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
अभी तक नहीं थे कोई राष्ट्रीय नियम
फिलहाल केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में दोपहिया एम्बुलेंस को अलग वाहन श्रेणी के रूप में मान्यता नहीं मिली है। इसलिए इनके निर्माण, सुरक्षा, पंजीकरण, फिटनेस जांच और मरीज को ले जाने से जुड़े कोई राष्ट्रीय मानक तय नहीं हैं। सरकार अब इस कमी को दूर करने के लिए नए नियम लागू करना चाहती है।
नए नियमों में क्या होगा खास?
प्रस्ताव के अनुसार, दोपहिया एम्बुलेंस को L2 श्रेणी के वाहन के रूप में शामिल किया जाएगा। इनमें मरीज को ले जाने की विशेष व्यवस्था और एम्बुलेंस से जुड़े जरूरी उपकरण होंगे। साथ ही इन वाहनों के डिजाइन, सुरक्षा और संचालन के लिए AIS-209 (Part 1): 2026 मानक लागू किया जाएगा।
कब से लागू होंगे नए नियम?
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद बनने वाली सभी L2 श्रेणी की दोपहिया एम्बुलेंस को नए सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। इसी तारीख से इन पर लगने वाली इमरजेंसी चेतावनी लाइटें भी तय मानकों के अनुसार होनी चाहिए।
फिटनेस जांच होगी अनिवार्य
दोपहिया एम्बुलेंस को परिवहन वाहन माना जाएगा। ऐसे में इनका फिटनेस सर्टिफिकेट हर दो साल में नवीनीकृत कराना होगा। फिटनेस जांच के दौरान स्ट्रेचर, मरीज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था, टायर, ब्रेक, चेतावनी लाइट, फायर एक्सटिंग्विशर और अन्य जरूरी उपकरणों की जांच की जाएगी।
