कहीं भी घूमना हो तो हवाई सफर सबसे आसान लगता है। दो चार घंटे में ही कहां से कहां पहुंचा जा सकता है। हालांकि क्या आपने कभी सोचा है कि हवाई सफर के दौरान जब हम एयरलाइन्स का खाना खाते हैं, तो उसमें वह स्वाद नहीं क्यों नहीं होता जो जमीन पर होता है। कई बार हमें खाना फीका, बेस्वाद या अजीब सा लगता है। आइए जानते हैं कि हजारों फीट की ऊंचाई पर हवा में उड़ते हुए हमारी बॉडी और टेस्ट बड्स में ऐसा क्या बदलाव आता है, जिससे खाने का पूरा जायका ही बदल जाता है।
हवाई सफर में क्यों नहीं आता खाने का स्वाद (Photo: iStock)
प्रेशर और नमी का असर
जब हवाई जहाज आसमान में हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा होता है, तो प्लेन के अंदर का दबाव और हवा में नमी का लेवल जमीन की तुलना में काफी कम होता है। जैसे ही विमान ऊंचाई पकड़ता है, हमारे शरीर में भी बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। कम नमी और केबिन के दबाव के कारण हमारी नाक में भी शुष्की आने लगती है। इसके साथ ही, हवा में नमी की कमी का सीधा असर हमारे टेस्ट बड्स पर पड़ता है।
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सूंघने की ताकत का कमजोर होना
वैज्ञानिकों की मानें तो खाने के स्वाद का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा हमारी स्मेल की क्षमता पर निर्भर करता है। जब हम सांस लेते हैं और खाने की खुशबू हमारी नाक के ऊपरी हिस्से तक पहुंचती है, तभी हमें खाने का असली स्वाद महसूस होता है। लेकिन हजारों फीट की ऊंचाई परहमारी सूंघने की क्षमता कमजोर हो जाती है। जब नाक ठीक से गंध को महसूस नहीं कर पाती, तो वही खाना हमें जमीन की तुलना में कम स्वादिष्ट और फीका लगने लगता है।
शरीर के अंदर के बदलाव
हवाई जहाज के अंदर का वातावरण हमारे शरीर की इंद्रियों को सुस्त कर देता है। जिस तरह ऊंचाई पर जाने पर हमारे कान सुन्न या बंद होने लगते हैं, ठीक उसी तरह हमारी जीभ की टेस्ट बड्स भी थोड़े सुस्त हो जाते हैं। यही वजह है कि एयरलाइंस अक्सर अपने खाने में मसालों, नमक और चीनी का इस्तेमाल थोड़ा ज्यादा करती हैं, ताकि यात्रियों को भोजन में थोड़ा स्वाद मिल सके।
इंजन का शोर
स्वाद बदलने के पीछे विमान के इंजन का लगातार गूंजने वाला शोरभी एक अहम कारण है। बहुत तेज और लगातार शोर के बीच इंसानों की स्वाद को पहचानने की क्षमता कम हो जाती है। विमान के भीतर का यह शोर हमारी मीठी चीजों की मिठास और नमकीन चीजों के नमक को कम कर देता है, जबकि खट्टी और मसालेदार चीजें फिर भी कुछ हद तक ठीक लगती हैं।
