Kanpur Tourist Place: कानपुर, उत्तर प्रदेश का ऐसा शहर है, जिसे 'भारत का मैनचेस्टर' कहा जाता था। यह न केवल एक औद्योगिक केंद्र है, बल्कि इतिहास, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा खजाना भी है। दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों से निकट होने के कारण यह अक्सर ट्रांजिट पॉइंट माना जाता है, लेकिन इस शहर में छिपे हैं कुछ ऐसे यूनिक स्थान जो हर टूरिस्ट को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। प्राचीन मंदिरों से लेकर 1857 की क्रांति के स्मारक और गंगा के शांत किनारों तक, कानपुर के ये स्थान ऑफबीट और अनदेखे हैं। आइए जानते हैं कि अगर आप कानपुर आएं तो कहां जरूर जाएं।
भीतरगांव मंदिर: गुप्त काल का अनोखा ईंटों का मंदिर
कानपुर से लगभग 45 किमी दूर भीतरगांव में स्थित यह मंदिर भारत का सबसे पुराना टेराकोटा और ईंटों से बना मंदिर है, जो 5वीं शताब्दी के गुप्त काल का है। भगवान जगन्नाथ को समर्पित यह मंदिर अपनी अनूठी बनावट के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यह पूरी तरह से ईंटों से बना है, जो उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग का प्रमाण है। आसपास की शांत हरियाली और ग्रामीण माहौल इसे एक ऑफबीट डेस्टिनेशन बनाता है। यह स्थान पुरातत्व प्रेमियों और इतिहास के शौकीनों के लिए स्वर्ग है। इसके साथ ही मान्यता है कि यहां भीषण गर्मी में गुंबद की शिलाओं से पानी की बूंदे टपकना मानसून आने का संदेशा होती हैं। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के साथ ही उनके बड़े भाई बलराम की एक छोटी सी प्रतिमा है।
मैस्कर घाट: 1857 की क्रांति का साइलेंट साक्षी
कानपुर में गंगा नदी के किनारे बसा मैस्कर घाट 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की एक दर्दनाक घटना का गवाह है। यहां नाना साहब के सिपाहियों द्वारा ब्रिटिश परिवारों की हत्या की गई थी, जिसे इतिहास में 'बिबीघर नरसंहार' के नाम से जाना जाता है। यहां पास में 'ऑल सोल्स मेमोरियल चर्च' एक गोथिक शैली का स्मारक है, जो उस समय की यादों को संजोता है। यह जगह यूनिक इसलिए है क्योंकि यह इतिहास की क्रूरता और गंगा की शांति का अनोखा मिश्रण पेश करती है। सूर्यास्त के समय कानपुर में सरसैय्या घाट पर गंगा आरती का दृश्य अविस्मरणीय है।
जाजमऊ: प्राचीन बौद्ध और जैन अवशेषों का खजाना
गंगा नदी के किनारे जाजमऊ कानपुर का सबसे पुराना ऐतिहासिक स्थल है, जिसका इतिहास 200 ईसा पूर्व तक जाता है। यहां बौद्ध स्तूप के खंडहर, सिद्धनाथ शिव मंदिर और जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ को समर्पित मंदिर हैं। पुरातत्व सर्वेक्षण ऑफ इंडिया द्वारा संरक्षित यह क्षेत्र हिंदू, बौद्ध और जैन संस्कृतियों का एक दुर्लभ संगम है। यह स्थान यूनिक इसलिए है क्योंकि यह कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में प्राचीन सभ्यता की झलक देता है। यहां चमड़े के बड़े-बड़े कारखाने हैं, जो देश-विदेश की नामचीन कंपनियों के हैं।
बिठूर
कानपुर से 25 किमी दूर गंगा नदी के तट पर बसा बिठूर एक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थल है। यह वही जगह है जहां महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी और जहां लव-कुश का जन्म हुआ था। ध्रुव टीला और ब्रह्मा द्वारा स्थापित शिवलिंग इस स्थान को और पवित्र बनाते हैं। बिठूर यूनिक इसलिए है क्योंकि यह रामायण के जीवंत प्रमाण है। यहां माता सीता की रसोई भी है। यहां पर ब्रह्मवर्त घाट और प्राचीन मंदिर भी देखने लायक हैं।
जैन ग्लास टेम्पल
कानपुर के कमला टावर क्षेत्र में स्थित जैन ग्लास टेम्पल एक अनोखा जैन मंदिर है, जहां कांच की नक्काशी और रंग-बिरंगे पैटर्न प्रकाश के साथ जादुई प्रभाव पैदा करते हैं। इस मंदिर की दीवारें और छतें कांच से सजी हैं, जो जैन कला और वास्तुकला का शानदार उदाहरण हैं।
कमला रिट्रीट
कानपुर में स्थित कमला रिट्रीट एक मेटेंन रिट्रीट सेंटर है। यहां म्यूजियम, स्विमिंग पूल और पार्क बने हुए हैं।
ये भी हैं यूनिक प्लेस
इन सभी के अलावा कानपुर में भारतीय दलहन अनुसंधान, नेशनल शुगर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, आईआईटी, जेके टेम्पल, मोतीझील, इंटरनेशनल स्टेडियम ग्रीन पार्क, जापानी गार्डन, गंगा बैराज भी घूमने व स्टडी के केंद्र हैं।
