Asia's Largest Meadow, Ali Bedni Bugyal: क्या आपने कभी ऐसी जगह की कल्पना की है जहां चारों तरफ सिर्फ हरी घास हो, ऊपर खुला नीला आसमान और सामने बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां? अगर नहीं, तो उत्तराखंड का अली-बेदनी बुग्याल आपको हैरान कर सकता है। यहां पहुंचकर ऐसा लगता है जैसे पहाड़ों के बीच किसी ने हरे रंग की बड़ी सी चादर बिछा दी हो। अली बुग्याल को कई ट्रेवल रिपोर्ट्स और सरकारी दस्तावेजों में एशिया का सबसे बड़ा Meadow बताया गया है।
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यह जगह उत्तराखंड के चमोली जिले में है और यहां पहुंचने के लिए आपको सड़क के बाद ट्रेक करना पड़ता है। यानी यह उन लोगों के लिए है जिन्हें सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय पहाड़ों पर चलने का असली मजा लेना है। यहां का खुलापन, शांत माहौल और दूर तक फैली हरियाली शहर की भागदौड़ से बिल्कुल अलग अनुभव देती है।
अली-बेदनी बुग्याल में क्या खास है?
'बुग्याल' का मतलब ही ऊंचाई पर स्थित घास का मैदान यानि की Meadow होता है। अली बुग्याल करीब 3,350 मीटर की ऊंचाई पर है, जबकि बेदनी बुग्याल इससे भी ऊपर स्थित है। दोनों के आसपास का इलाका विशाल अल्पाइन घास के मैदानों, जंगलों और हिमालयी चोटियों के खूबसूरत नजारे के लिए जाना जाता है।
यहां से त्रिशूल, नंदा घुंटी और चौखंबा जैसी चोटियों के शानदार दृश्य देखने को मिल सकते हैं। रास्ते में जंगल, जंगली फूल और पहाड़ी गांव इस सफर को और दिलचस्प बनाते हैं।
दिल्ली से कैसे पहुंचें?
दिल्ली से सीधे बुग्याल तक कोई सड़क नहीं जाती। आमतौर पर यात्रा का रास्ता दिल्ली से ऋषिकेश/देहरादून की ओर और फिर कर्णप्रयाग होते हुए लोहारजुंग तक जाता है। लोहारजुंग को इस ट्रेक का प्रमुख शुरुआती पॉइंट माना जाता है। यहां से आगे पहाड़ी रास्ते पर पैदल चलना पड़ता है।
अली-बेदनी बुग्याल का ट्रेक पूरा करने में आमतौर पर 5-6 दिन लगते हैं। इसे मध्यम कठिनाई वाला ट्रेक माना जाता है। पूरे रास्ते की दूरी करीब 27 से 35 किलोमीटर है, हालांकि चुने गए रूट के हिसाब से इसमें थोड़ा फर्क आ सकता है
यहां पहुंचकर क्या-क्या कर सकते हैं?
सबसे पहली चीज है, बस पैदल घूमिए और उस विशाल हरियाली को महसूस कीजिए। यहां ट्रेकिंग के अलावा नेचर फोटोग्राफी, कैंपिंग और आसपास के हिमालयी नजारों को देखना प्रमुख आकर्षण हैं।
बेदनी कुंड भी इस यात्रा का खास हिस्सा है। इसके आसपास का शांत वातावरण और पहाड़ों का बैकग्राउंड आपको कुछ देर बिल्कुल चुप होकर बैठने पर मजबूर कर सकता है। रास्ते में मिलने वाले गांव, वहां के जीवन को करीब से देखना भी इस सफर का हिस्सा बन सकता है।
कब जाएं?
हरी घास और फूलों वाला बुग्याल देखना है तो मौसम का ध्यान रखना जरूरी है। सितंबर से नवंबर के बीच का समय ये ट्रेक करने के लिए अच्छा माना जाता है। हालांकि, ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है। इसलिए ट्रेक पर निकलने से पहले स्थानीय मौसम, रास्ते की स्थिति और परमिट/ट्रेक नियमों की जानकारी जरूर लें। यह जगह उन लोगों के लिए खास है जिन्हें कम भीड़, ज्यादा प्रकृति और थोड़ा एडवेंचर पसंद है।
