UPI फ्रॉड से गंवाया पैसा, तो क्या करें? 3 दिन होते हैं अहम, कैसे और कितनी रकम होगी वापस

UPI Fraud: यूपीआई फ्रॉड होने पर तुरंत बैंक और 1930 पर शिकायत करें। आरबीआई के अनुसार 3 दिन में सूचना देने पर आपका नुकसान जीरो हो सकता है।

UPI Fraud: डिजिटल भुगतान के इस दौर में यूपीआई हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना, नकली कस्टमर केयर नंबर, धोखाधड़ी वाले पेमेंट रिक्वेस्ट या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स के जरिए स्कैमर्स चंद मिनटों में बैंक खाता खाली कर सकते हैं। कई बार लोगों को इसका पता तब चलता है जब उनके खाते से पैसे कट चुके होते हैं। हालांकि, यूपीआई फ्रॉड का शिकार होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि ग्राहक को पूरे नुकसान का खामियाजा खुद उठाना पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों को अनधिकृत (unauthorized) इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन से बचाने के लिए एक सख्त नियम और ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत कुछ मामलों में ग्राहकों को 'जीरो लायबिलिटी' यानी शून्य नुकसान का लाभ भी मिल सकता है।

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यूपीआई फ्रॉड (UPI Fraud) से गंवाया पैसा? शुरुआती 3 दिन तय करते हैं कितनी रकम वापस मिलेगी

क्या बैंक को रिफंड देना होगा? जानिए आरबीआई के नियम

आरबीआई के नियमों के अनुसार, हर यूपीआई फ्रॉड को अनधिकृत ट्रांजैक्शन नहीं माना जाता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि फ्रॉड कैसे हुआ, क्या ग्राहक ने अपनी जानकारी शेयर की थी या पेमेंट खुद अप्रूव किया था और बैंक को कितनी जल्दी सूचना दी गई। अगर कोई अनधिकृत लेन-देन बैंक की अपनी लापरवाही, गलती या सिस्टम की कमी के कारण हुआ है, तो ग्राहक की देनदारी शून्य (Zero Liability) होती है। इसके लिए यह मायने नहीं रखता कि बैंक को कितने दिनों में सूचना दी गई। वहीं, अगर फ्रॉड किसी तीसरे पक्ष की सेंधमारी के कारण हुआ है और इसमें बैंक या ग्राहक दोनों की कोई गलती नहीं है, तो बैंक से सूचना मिलने के 3 कार्यदिवसों (working days) के भीतर शिकायत करने पर ग्राहक का नुकसान शून्य हो सकता है। जानकारों के मुताबिक, नियमों के तहत योग्य मामलों में बैंकों को 10 दिनों के भीतर प्रोविजनल क्रेडिट (अस्थाई राशि) देना होता है और 90 दिनों के अंदर शिकायत का निपटारा करना जरूरी है।

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