आखिर क्या है AI, जिसके पीछे भाग रहे अमेरिका-चीन, PM मोदी के इस प्लान से दुनिया को झुकाएगा भारत

Artificial Intelligence And Global Leadership: 1949 में, कंप्यूटर वैज्ञानिक एडमंड कॉलिस बर्कली ने किताब "Giant Brains, or Machines that Think" पब्लिश की, जिसमें उन्होंने नए कंप्यूटर मॉडलों की तुलना मानव मस्तिष्क से की। इसके बाद 1955 में, जॉन मैक्कार्थी ने डार्टमाउथ यूनिवर्सिटी में "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" पर एक वर्कशॉप की, जहां इस शब्द का पहली बार उपयोग किया गया और फिर यह शब्द आम बोलचाल में इस्तेमाल होने लगा।

Artificial Intelligence And Global Leadership: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पेरिस में आयोजित एक ग्लोबल एआई समिट (Global AI summit) को संबोधित करते हुए कहा कि AI के फायदों को सभी देशों के साथ, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के साथ, साझा करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने AI में मौजूद बायस (पूर्वाग्रह) के बारे में भी चेतावनी दी। सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं दुनियाभर के लीडर्स आज एआई पर बात कर रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच अब एआई को लेकर जंग तेज हो गई है। इसके अलावा दुनियाभर की टेक कंपनियां भी एआई टेक्नोलॉजी पर जमकर पैसा और रिसोर्स खपा रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर एआई क्या है, क्या-क्या कर सकता है और भविष्य में हम एआई को किस रूप में देख सकते हैं। इसके अलावा एआई को लेकर भारत की तैयारियों पर भी बात करेंगे।

Artificial Intelligence And Global Leadership

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ग्लोबल एआई समिट में क्या बोले पीएम मोदी?

ग्लोबल एआई समिट में दुनियाभर के लीडर्स को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई के फायदे और नुकसान दोनों गिनाए। उन्होंने कहा, "हमें अपनी संसाधन और टैलेंट एक साथ लाकर ऐसे ओपन सोर्स सिस्टम विकसित करने चाहिए जो विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा दें और अच्छे डेटा सेट्स तैयार करें, जो बायस से मुक्त हों ताकि पूरी दुनिया को इसका फायदा मिल सके। AI का उद्देश्य लोगों के लिए काम करना होना चाहिए। हमें साइबर सुरक्षा, गलत जानकारी और डीप फेक्स (फर्जी वीडियो) जैसी समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा।"

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