Artificial Intelligence And Global Leadership: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पेरिस में आयोजित एक ग्लोबल एआई समिट (Global AI summit) को संबोधित करते हुए कहा कि AI के फायदों को सभी देशों के साथ, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के साथ, साझा करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने AI में मौजूद बायस (पूर्वाग्रह) के बारे में भी चेतावनी दी। सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं दुनियाभर के लीडर्स आज एआई पर बात कर रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच अब एआई को लेकर जंग तेज हो गई है। इसके अलावा दुनियाभर की टेक कंपनियां भी एआई टेक्नोलॉजी पर जमकर पैसा और रिसोर्स खपा रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर एआई क्या है, क्या-क्या कर सकता है और भविष्य में हम एआई को किस रूप में देख सकते हैं। इसके अलावा एआई को लेकर भारत की तैयारियों पर भी बात करेंगे।
Artificial Intelligence And Global Leadership
ग्लोबल एआई समिट में क्या बोले पीएम मोदी?
ग्लोबल एआई समिट में दुनियाभर के लीडर्स को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई के फायदे और नुकसान दोनों गिनाए। उन्होंने कहा, "हमें अपनी संसाधन और टैलेंट एक साथ लाकर ऐसे ओपन सोर्स सिस्टम विकसित करने चाहिए जो विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा दें और अच्छे डेटा सेट्स तैयार करें, जो बायस से मुक्त हों ताकि पूरी दुनिया को इसका फायदा मिल सके। AI का उद्देश्य लोगों के लिए काम करना होना चाहिए। हमें साइबर सुरक्षा, गलत जानकारी और डीप फेक्स (फर्जी वीडियो) जैसी समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "तकनीकी विकास को मानवता के लिए प्रभावी और उपयोगी बनाने के लिए इसे लोकल इकोसिस्टम में गहरे रूप से समाहित होना चाहिए।" उन्होंने यह भी बताया कि AI से सबसे बड़ा डर "नौकरी का नुकसान" है, लेकिन इतिहास ने दिखाया है कि तकनीकी विकास से काम खत्म नहीं होते। समय के साथ काम के रूप बदलते हैं और नए प्रकार की नौकरियां जनरेट होती हैं।
आखिर क्या है AI, जिसकी पीछे भाग रहे अमेरिका-चीन ?
AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) एक ऐसी तकनीक है, जो मशीनों और कंप्यूटरों को इंसानों जैसे सोचने और समझने की क्षमता देती है। इसका मतलब है कि कंप्यूटर सिर्फ आदेश नहीं मानते, बल्कि वे डाटा को समझकर और एनालिसिस करके फैसले ले सकते हैं। लेकिन फिलहाल जिस एक क्षेत्र में एआई को लेकर बात की जा रही है वो है चैटबॉट और एप्स। दरअसल, एआई चैटबॉट्स को लेकर चर्चाएं ओपनएआई के एआई चैटबॉट ChatGPT के लॉन्च के साथ शुरू हुई। ChatGPT इतना हिट हुआ कि गूगल, मेटा एनवीडिया और एप्पल जैसी कंपनियों को अपना एआई टूल लाने पर मजबूर होना पड़ा।
लेकिन एआई पर जंग यही तक सीमित नहीं है। अमेरिका और चीन जैसे देश AI में एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। क्योंकि इसे भविष्य की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी पावर माना जा रहा है। उदाहरण के लिए, AI का इस्तेमाल स्वचालित कारों, रोबोट्स, और एडवांस सैन्य टेक्नोलॉजी उपकरणों में किया जा सकता है। चीन ने 2017 में "New Generation Artificial Intelligence Development Plan" लॉन्च किया था, जिसमें 2030 तक AI के क्षेत्र में लीडर बनने का टारगेट रखा है। हाल ही में चीनी कंपनी ने DeepSeek AI मॉडल पेश किया है, जिसने अमेरिकी स्टॉक मार्केट में तहलका मचा दिया। वहीं, अमेरिका में कंपनियां जैसे Google और Microsoft और एनवीडिया भी AI में खूब निवेश कर रही हैं, और उनका AI उपयोग बिजनेस, एजुकेशन और हेल्थ सर्विस में हो रहा है।
पहली बार कब इस्तेमाल हुआ "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" शब्द?
आपको एआई सुनकर ऐसा लगता होगा कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) हाल ही में विकसित हुई टेक्नोलॉजी है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मेनस्ट्रीम में पिछले कुछ सालों से बढ़ा है, है ना? लेकिन असल में, AI की नींव 1900 के दशक की शुरुआत में रखी गई थी। हालांकि, साल 1949 तक इसमें ज्यादा डेवलपमेंट नहीं हुआ था।
लेकिन 1949 में, कंप्यूटर वैज्ञानिक एडमंड कॉलिस बर्कली ने किताब "Giant Brains, or Machines that Think" पब्लिश की, जिसमें उन्होंने नए कंप्यूटर मॉडलों की तुलना मानव मस्तिष्क से की। इसके बाद 1955 में, जॉन मैक्कार्थी ने डार्टमाउथ यूनिवर्सिटी में "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" पर एक वर्कशॉप की, जहां इस शब्द का पहली बार उपयोग किया गया और फिर यह शब्द आम बोलचाल में इस्तेमाल होने लगा। जॉन मैक्कार्थी को फादर ऑफ एआई भी कहा जाता है।
2020 से AI को मिला बूस्ट
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां काफी समय से एआई पर काम कर रही हैं, लेकिन यह उतनी तेजी से नहीं हो रहा था। मार्केट को बूस्ट मिला जब 2020 में, OpenAI ने GPT-3 की बीटा टेस्टिंग शुरू की। यह एक ऐसा मॉडल है जो डीप लर्निंग का उपयोग करके कोड, कविता और अन्य लेखन कार्य कर सकता है। हालांकि यह अपनी तरह का पहला मॉडल नहीं था, लेकिन यह पहली बार था जब किसी AI ने ऐसा कंटेंट बनाया जो इंसानों द्वारा लिखे गए शब्दों जैसा था। इसके बाद से फिर से एआई को लेकर जंग शुरू हो गई।
क्या सिर्फ AI के दम पर दुनिया पर कर सकेंगे राज?
जिस देश के पास सबसे एडवांस AI टेक्नोलॉजी होगी, वह आर्थिक, सैन्य और तकनीकी रूप से दुनिया में बढ़त बना सकता है। हालांकि, केवल AI से दुनिया पर राज करना संभव नहीं, क्योंकि कूटनीति, सैन्य शक्ति और संसाधन भी अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि अमेरिका और चीन जैसे देश एआई पर तेजी से काम कर रहे हैं। अब भारत भी अपना एआई प्लान बना रहा है।
क्या है भारत की AI को लेकर तैयारी?
भारत ने भी अपना IndiaAI मिशन लॉन्च किया है। जो भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देने की एक पहल है। इसका मकसद स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट सिटी और ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ाना है। सरकार रिसर्च, स्टार्टअप्स, और स्किल डेवलपमेंट को सपोर्ट कर रही है ताकि देश AI में आगे बढ़ सके। हाल ही में बजट में भी एआई सेंटर के लिए 500 करोड़ रुपये दिए जाने की बात कही गई थी। इसके अलावा राष्ट्रीय AI पोर्टल और सुपरकंप्यूटिंग प्रोजेक्ट जैसी योजनाएं भी इसका हिस्सा हैं।
AI का इतिहास
- 1950: एलेन ट्यूरिंग ने AI के लिए "ट्यूरिंग टेस्ट" तैयार किया।
- 1956: AI शब्द को पहली बार डार्टमाउथ समिट में इस्तेमाल किया गया।
- 1960-70: पहली बार AI प्रोग्रामिंग और समस्या सुलझाने के सिस्टम बने।
- 1970-80: एक्सपर्ट सिस्टम (Expert Systems) बनाए गए।
- 1980: मशीनों को सीखने की टेक्नोलॉजी मशीन लर्निंग (Machine Learning) की शुरुआत हुई।
- 1997: IBM का डीप ब्लू कंप्यूटर शतरंज में चैम्पियन को हरा पाया।
- 2000: एलेक्सा और सिरी जैसे वॉयस असिस्टेंट ऐप्स बने।
- 2012: डीप लर्निंग (Deep Learning) तकनीक से AI में सुधार हुआ।
- 2015: गूगल के अल्फागो ने गो कॉन्टैस्ट में चैंपियन को हराया।
- 2020 और अब: AI का इस्तेमाल हेल्थ, बिजनेस, स्मार्टफोन, रोबोट्स और अन्य जगहों पर बढ़ने लगा।
