भारत में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों के बीच मोबाइल फोन कंपनियों ने सरकार से बड़ी मांग की है। इंडस्ट्री बॉडी इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने मोबाइल फोन पर लगने वाले GST को मौजूदा 18 फीसदी से घटाकर सिर्फ 5 फीसदी करने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि टैक्स में कटौती से स्मार्टफोन की कीमत कम होगी और कमजोर पड़ रही घरेलू मांग को फिर से बढ़ावा मिल सकेगा।
वित्त मंत्री और IT मंत्री के सामने रखी मांग
वित्त मंत्री और IT मंत्री के सामने रखी मांग
ICEA ने 2 और 3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्री अश्विनी वैष्णव को अलग-अलग प्रतिनिधित्व भेजकर इस प्रस्ताव को अगली GST काउंसिल की बैठक में रखने की अपील की है। ICEA में Apple, Xiaomi, Oppo, Vivo, Dixon, Bhagwati और Lava जैसी घरेलू और ग्लोबल कंपनियां शामिल हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि 18 फीसदी GST खासतौर पर एंट्री-लेवल स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। ऐसे समय में जब फोन की कीमतें बढ़ रही हैं और लोग पुराने फोन को ज्यादा समय तक चला रहे हैं, टैक्स में कमी से बाजार को राहत मिल सकती है।
एक साल में 35-45% तक महंगे हुए सस्ते स्मार्टफोन
स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमत है। ICEA के मुताबिक सितंबर 2025 से मोबाइल DRAM और NAND फ्लैश की कीमतों में करीब चार गुना तक वृद्धि हुई है। इसका एक कारण AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग भी है, जिसके चलते ग्लोबल स्तर पर मेमोरी क्षमता का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो रहा है।
इसका सीधा असर एंट्री-लेवल स्मार्टफोन पर पड़ा है। ICEA के अनुसार पिछले एक साल में अलग-अलग ब्रांड के शुरुआती स्मार्टफोन करीब 35 से 45 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं। कंपनियों का कहना है कि मेमोरी की बढ़ी लागत का पूरा बोझ निर्माता खुद नहीं उठा सकते और इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना पड़ रहा है।
10 हजार रुपये से कम वाले फोन की सप्लाई भी घटी
महंगाई का असर 10,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सेगमेंट पर भी दिखाई दे रहा है। ICEA के मुताबिक इस कीमत वाले स्मार्टफोन की सप्लाई घटकर 5 फीसदी से भी कम रह गई है। एसोसिएशन ने समझाया कि अगर किसी फोन की टैक्स से पहले की कीमत में 1 रुपये की बढ़ोतरी होती है तो 18 फीसदी GST की वजह से ग्राहक को उस पर अतिरिक्त 18 पैसे टैक्स भी देना पड़ता है। ऐसे में फोन की बेस कीमत बढ़ने के साथ टैक्स का बोझ भी बढ़ जाता है।
पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वालों पर ज्यादा असर
ICEA का कहना है कि महंगे स्मार्टफोन का सबसे ज्यादा असर पहली बार फोन खरीदने वाले ग्राहकों, ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ताओं और कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है। अगर GST को 5 फीसदी किया जाता है तो फोन की शुरुआती कीमत कम हो सकती है। कंपनियों के मुताबिक इससे लोग पुराने फोन को बदलने के लिए प्रोत्साहित होंगे और फीचर फोन या 2G नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के स्मार्टफोन पर शिफ्ट होने की रफ्तार भी बढ़ सकती है।
2017 में 12% था GST, 2020 में बढ़कर 18% हुआ
ICEA ने अपनी मांग के समर्थन में GST लागू होने से पहले की टैक्स व्यवस्था का भी हवाला दिया है। एसोसिएशन के मुताबिक GST से पहले मोबाइल फोन पर 1 फीसदी बेसिक एक्साइज ड्यूटी लगती थी, जबकि ज्यादातर राज्यों में VAT 5 फीसदी या उससे कम था। अलग-अलग राज्यों के हिसाब से टैक्स में अंतर जरूर था।
GST लागू होने के समय जुलाई 2017 में मोबाइल फोन को 12 फीसदी GST स्लैब में रखा गया था। इसके बाद अप्रैल 2020 में GST बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया गया। अब ICEA चाहती है कि इसे घटाकर 5 फीसदी किया जाए।
भारत में तेजी से बढ़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग
दिलचस्प बात यह है कि घरेलू बाजार में मांग कमजोर होने के बावजूद भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन और एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा है। ICEA के अनुसार भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन FY2014-15 में करीब 18,900 करोड़ रुपये था, जो FY2025-26 में बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इसी अवधि में मोबाइल फोन का एक्सपोर्ट 1,566 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। ICEA के मुताबिक भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग देश है। FY2025-26 में मोबाइल फोन भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट प्रोडक्ट भी बन गया।
कंपनियां चाहती हैं मजबूत हो घरेलू बाजार
इंडस्ट्री का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट में तेजी के बावजूद घरेलू खपत उसी रफ्तार से नहीं बढ़ी है। कंपनियों के लिए बड़ा घरेलू बाजार जरूरी है, क्योंकि इससे उत्पादन का बेहतर अनुमान लगाने, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ाने, नए प्रोडक्ट विकसित करने और डिस्ट्रीब्यूशन व आफ्टर-सेल्स नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। ICEA ने मोबाइल फोन के साथ-साथ मोबाइल कंपोनेंट्स पर GST दरों को भी तर्कसंगत बनाने की मांग की है।
मोबाइल कंपनियों ने की GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग, महंगाई से मिलेगी बड़ी राहतमोबाइल कंपनियों ने की GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग, महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत
GST घटने से सरकार का राजस्व जरूरी नहीं घटेगा
मोबाइल कंपनियों का यह भी तर्क है कि GST को 18 से 5 फीसदी करने का मतलब सरकार के राजस्व में उतनी ही बड़ी गिरावट होना जरूरी नहीं है। कंपनियों के मुताबिक टैक्स कम होने से स्मार्टफोन की बिक्री बढ़ सकती है, जिससे ज्यादा बिक्री के जरिए कुछ राजस्व की भरपाई हो सकती है। इसके अलावा ग्रे मार्केट में होने वाली खरीदारी के औपचारिक बाजार में आने और मोबाइल डेटा, सब्सक्रिप्शन तथा दूसरी डिजिटल सेवाओं से मिलने वाले GST कलेक्शन से भी सरकार को फायदा हो सकता है।
