AI पर सरकार का अलर्ट! अति उत्साही न आएं, विश्वसनीय होने पर ही करें इस्तेमाल

Artificial Intelligence: संस्थानों को एआई आधारित समाधानों के इस्तेमाल में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यह तब तक करना सही नहीं है जब तक उनका पूरा परीक्षण न हो और वे विश्वसनीय न हों। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि बिना परीक्षण के एआई पर अत्यधिक भरोसा जोखिम भरा हो सकता है और इसे अपनाने से पहले विश्वसनीयता सुनिश्चित करनी जरूरी है।

Artificial Intelligence: संस्थानों को कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित समाधानों के इस्तेमाल को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यह बात शुक्रवार को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के ’डेटा इन्फॉर्मेटिक्स एंड इनोवेशन’ प्रभाग के उपमहानिदेशक रोहित भारद्वाज ने कही। उन्होंने ’एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि एआई-सक्षम तकनीकों को अपनाने से पहले उनका पूरी तरह से परीक्षण और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित समाधानों के इस्तेमाल को लेकर तब तक अत्यधिक उत्साह नहीं दिखाना चाहिए, जब तक उनका पूर्ण परीक्षण न हो और वे विश्वसनीय न हों।

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सरकारी अधिकारी का एआई पर सतर्क दृष्टिकोण (तस्वीर-istock)

एआई-सक्षम डेटा की तैयारी

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारद्वाज ने कहा कि सरकारी विभागों को अपने आंकड़ों को कंप्यूटर द्वारा पढ़े जाने योग्य यानी ‘मशीन-रीडेबल’ प्रारूप में तैयार करना चाहिए। इसके लिए डेटा के साथ ‘कॉन्टेक्स्ट फाइल’, ‘सिमैंटिक्स’ और ‘मेटाडेटा’ शामिल होना जरूरी है। उन्होंने आसान शब्दों में समझाया कि ‘कॉन्टेक्स्ट फाइल’ वह होती है जिसमें किसी जानकारी को सही ढंग से समझने के लिए आवश्यक पृष्ठभूमि होती है। ‘सिमैंटिक्स’ का मतलब है डेटा और शब्दों के वास्तविक अर्थ और उनके सही संदर्भ को समझना। वहीं, ‘मेटाडेटा’ डेटा के बारे में अतिरिक्त जानकारी होती है, जैसे कि उसकी तारीख, स्रोत और संरचना। उन्हों ने जोर देकर कहा कि जानकारी को संरचित प्रारूप में संग्रहित किया जाए ताकि वे एआई-सक्षम बन सकें। इसका उद्देश्य यह है कि एआई आसानी से डेटा का विश्लेषण कर सके और परिणाम अधिक विश्वसनीय हों।

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