GenAI: जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेनएआई) वर्ष 2030 तक भारतीय वित्तीय सेवाओं की उत्पादकता को 34 से 38 प्रतिशत और खासकर बैंकिंग परिचालन को 46 प्रतिशत तक बढ़ाने में मदद करेगा। यह दावा एक हालिया रिपोर्ट में किया गया है। ईवाई की रिपोर्ट के अनुसार, जेनएआई भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र को नया रूप दे रहा है। इससे ग्राहक जुड़ाव, परिचालन दक्षता और जोखिम मूल्यांकन में महत्वपूर्ण सुधार हो रहा है।
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सर्वे में 125 से ज्यादा कॉरपोरेट अधिकारियों की राय
यह रिपोर्ट देशभर के 125 से अधिक कॉरपोरेट अधिकारियों के इंटरव्यू पर आधारित है। इनमें वित्तीय सेवाओं, खुदरा, हेल्थकेयर, मीडिया, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हैं। अध्ययन के अनुसार, 74 प्रतिशत वित्तीय कंपनियों ने जेनएआई से जुड़े प्रोजेक्ट शुरू कर दिए हैं, जबकि 11 प्रतिशत कंपनियां इसे बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में बढ़ रही हैं।
एआई में निवेश तेजी से बढ़ रहा है
रिपोर्ट के अनुसार, 42 प्रतिशत कंपनियां जेनएआई से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रही हैं। इनमें वॉयस बॉट्स, ईमेल ऑटोमेशन, बिजनेस इंटेलिजेंस और वर्कफ़्लो ऑटोमेशन जैसे सेक्टर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
ग्राहक सेवा प्राथमिकता में सबसे आगे
68 प्रतिशत कंपनियां जेनएआई को ग्राहक सेवा में प्राथमिकता दे रही हैं। इसके बाद 47 प्रतिशत कंपनियां परिचालन, 26 प्रतिशत बिक्री और 21 प्रतिशत सूचना प्रौद्योगिकी में इसे अपनाने पर फोकस कर रही हैं। जेनएआई के उपयोग से 63 प्रतिशत कंपनियों ने ग्राहक संतुष्टि में सुधार देखा है, जबकि 58 प्रतिशत कंपनियों ने लागत में कमी की पुष्टि की है।
बैंकिंग क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद
ईवाई इंडिया में साझेदार और वित्तीय सेवा प्रमुख प्रतीक शाह ने कहा कि 2024-25 में वित्तीय सेवा क्षेत्र में जेनएआई का व्यावहारिक उपयोग बढ़ेगा। बैंकिंग संस्थाएं इसे अपने मुख्य सिस्टम में एकीकृत कर रही हैं, जिससे परिचालन लागत में भारी कमी आ रही है। शाह के अनुसार, एआई-संचालित समाधान सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों की प्रति इकाई लागत को 10वें हिस्से तक कम कर सकते हैं। इससे बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को और बढ़ावा मिलेगा।
इनपुट- भाषा
