Microsoft के सह-संस्थापक और अरबपति बिल गेट्स (Bill Gates) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि AI से नौकरियों पर बड़ा असर पड़ सकता है और आने वाले समय में यह मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। गेट्स ने कहा कि AI के जोखिमों से निपटना अब पूरी दुनिया की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
AI की रफ्तार ने Gates को भी चौंकाया/Photo-gatesnotes
हाल ही में द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए करीब एक घंटे के इंटरव्यू में गेट्स ने कहा कि टेक इंडस्ट्री के लोग निजी बातचीत में AI की तेजी से बढ़ती क्षमताओं को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर इन खतरों को कम करके पेश किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इसके पीछे AI इंडस्ट्री में हो रहा भारी निवेश और भविष्य में आने वाला बड़ा मुनाफा एक प्रमुख कारण है।
AI की रफ्तार ने Gates को भी चौंकाया
Gates ने बताया कि टेक्नोलॉजी ने उन्हें अपने जीवन में तीन बार वास्तव में हैरान किया है। पहली बार 1980 में जब उन्होंने ग्राफिकल यूजर इंटरफेस देखा था। दूसरी बार 2022 में, जब OpenAI के अधिकारियों ने उन्हें उस तकनीक का प्रदर्शन किया था जो आगे चलकर ChatGPT बनी। तीसरी बार इस साल Claude Code जैसे AI टूल की क्षमताओं को देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा कि कोडिंग वह क्षेत्र है जिसे वह सबसे अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन AI की मौजूदा क्षमता ने उन्हें चौंका दिया है। गेट्स के मुताबिक, अब AI कुछ मायनों में उनसे बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
पिछली टेक्नोलॉजी से अलग है AI का दौर
Gates का कहना है कि पिछली तकनीकी क्रांतियों ने भले ही कुछ नौकरियां खत्म की हों, लेकिन अंततः नई नौकरियां भी पैदा हुईं। हालांकि, उनका मानना है कि AI का दौर इससे पूरी तरह अलग है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बड़े पैमाने पर नौकरी जाने की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है। उनके मुताबिक, AI धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में पहुंच सकता है। ऐसे में एक सेक्टर से नौकरी गंवाने वाले लोगों को दूसरे सेक्टर में आसानी से रोजगार मिलना मुश्किल हो सकता है।
AI के इस्तेमाल पर ‘टोकन टैक्स’ का सुझाव
AI से होने वाले संभावित रोजगार नुकसान को कम करने के लिए गेट्स ने AI के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। इसे उन्होंने ‘Token Tax’ का नाम दिया है। AI सिस्टम में ‘टोकन’ कंप्यूटिंग की एक बुनियादी इकाई होती है। उनका तर्क है कि AI के इस्तेमाल को थोड़ा महंगा बनाने से कंपनियों को इंसानों की जगह मशीनों को लगाने से पहले ज्यादा विचार करना पड़ सकता है। इस टैक्स से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल उन लोगों की मदद करने में किया जा सकता है, जिनकी नौकरियां AI की वजह से चली जाती हैं।
कुछ नौकरियों को AI से बदलने पर रोक की मांग
गेट्स ने कुछ खास तरह की नौकरियों को AI से पूरी तरह बदलने पर रोक लगाने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने इसके लिए ‘Human Reserved’ जैसी व्यवस्था की बात कही। उनका मानना है कि केयरगिविंग जैसी कुछ नौकरियां बेहद व्यक्तिगत होती हैं और इन्हें पूरी तरह मशीनों के हवाले करना उचित नहीं होगा। साथ ही कुछ ऐसे रोजगार भी हैं, जिनसे हटाए गए लोगों के लिए दूसरी नौकरी तलाशना मुश्किल हो सकता है।
बायोटेररिज्म को लेकर भी चेतावनी
AI के सबसे गंभीर खतरों में से एक के तौर पर बिल गेट्स ने बायोटेररिज्म का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि भविष्य में कुछ लोग एडवांस AI की मदद से खतरनाक नए रोगजनक या जैविक हथियार विकसित करने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए ऐसे AI सिस्टम की अनिवार्य समीक्षा होनी चाहिए, जिनका इस्तेमाल खतरनाक अणु बनाने या महामारी फैलाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने AI के सबसे खतरनाक इस्तेमाल पर केवल कंपनियों की स्वैच्छिक गाइडलाइन या सेल्फ-रेगुलेशन पर निर्भर रहने को पर्याप्त नहीं माना। गेट्स ने इसके बजाय अंतरराष्ट्रीय समझौतों और स्पष्ट नियमों की वकालत की है।
‘दुनिया की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए’
गेट्स ने कहा कि AI के जोखिमों को लेकर वह खुद ‘शॉक’ की स्थिति में हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि इन मुद्दों पर ज्यादा तेजी से कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि वह दुनिया के नेताओं के साथ होने वाली अपनी बातचीत में AI के खतरों का मुद्दा लगातार उठाएंगे।
बिल गेट्स ने स्वीकार किया कि AI के खिलाफ चेतावनी देने की उनकी स्थिति कुछ हद तक विडंबनापूर्ण है, क्योंकि उन्होंने खुद आधुनिक कंप्यूटर इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद उनका कहना है कि मौजूदा हालात में AI के संभावित नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, अब जरूरत इस बात की है कि AI से मिलने वाले फायदों के साथ-साथ उसके गंभीर जोखिमों पर भी उतनी ही तेजी से काम किया जाए।
