कौन हैं झंडू कुमार? अपने सपने को पूरा करने के लिए बेचा ई-रिक्शा, अब CWG में भारत को दिलाया पहला मेडल

कोविड महामारी के दौरान परिवार का खर्च चलाने के लिए झंडू कुमार ई-रिक्शा चलाते थे। नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने 2023 में अपना वाहन बेच दिया। इस जोखिम भरे फैसले से उन्हें बड़ी कामयाबी मिली और इसके बाद उन्होंने नेशनल और इंटरनेशनल मेडल जीते। उन्होंने खेलो इंडिया पैरा गेम्स में सिल्वर मेडल जीता। अब झंडू कुमार कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है।

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने मेंस के हेवीवेट वर्ग में 190 किग्रा भार उठाकर कांस्य पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का पहला पदक दिलाया। आज झंडू कुमार का नाम पूरी दुनिया में मशहूर हो गया, लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब कुमार को परिवार के पालन पोषण के लिए ई-रिक्शा और सब्जी बेचनी पड़ी थी।

Jhandu kumar

झंडू कुमार ने जीता कॉमनवेल्थ में मेडल।

साल 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान बिहार के झंडू कुमार ने गुजारा करने और परिवार की मदद के लिए ई-रिक्शा चलाया। इसके पहले वह नालंदा जिले के हरनौत बाजार में सब्जी की दुकान चलाते थे, लेकिन वहां ओवरब्रिज बनने की वजह से उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने ई-रिक्शा चलाया। हालांकि, इन मुश्किल समय में भी कुमार ने खेलने का सपना नहीं छोड़ा। आर्थिक तंगी और पांच साल की उम्र से पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने पैरा और एबल-बॉडी पावरलिफ्टिंग दोनों में स्टेट और नेशनल लेवल पर मेडल जीतकर अपने सपने को जिंदा रखा।

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