हर चार साल की तरह इस बार भी फीफा वर्ल्ड कप के शुरू होते ही भारत में प्रवासी पक्षी की तरह फुटबॉल फैंस अपने-अपने टीवी सेट के सामने झूमने लगे हैं। बिना इस बात की परवाह किए कि भारतीय टीम क्यों इस फीफा वर्ल्ड कप में नहीं खेल रही है, सबने अपने-अपने पसंदीदा खिलाड़ियों जैसे लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो की गोल पर तालियां बजाना शुरू कर दिया है। लेकिन अगर आप इस खेल के सच्चे प्रशंसक हैं तो आपको जरूर इस बात का मलाल होगा कि क140 करोड़ की आबादी वाला देश भारत क्यों फुटबॉल की इस दीवानगी में भागीदार नहीं है।
सरप्रीत सिंह (साभार-X)
लेकिन इस बीच एक खबर ऐसी आई जिसने यहां के फैंस के चेहरे पर थोड़ी खुशी लाने का काम किया। लोग यह जानकर ही खुश हैं कि भारत नहीं चलो कोई भारतीय मूल को तो इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहा है। वह खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि न्यूजीलैंड के सरप्रीत सिंह हैं जो ईरान के खिलाफ मैच में एक्शन में दिखे थे।
इसके साथ ही न्यूजीलैंड के मिडफील्डर सरप्रीत सिंह ने इतिहास रच दिया। वह भारतीय मूल के पहले ऐसे फुटबॉलर बन गए हैं जिन्होंने फीफा विश्व कप के मैच में स्टार्टिंग प्लेइंग इलेवन में जगह बनाई। सरप्रीत ईरान के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ रहे मैच में न्यूजीलैंड की शुरुआती एकादश में शामिल थे। ऑकलैंड में पंजाबी माता-पिता के घर जन्मे 27 वर्षीय सरप्रीत ने इस मैच से वर्ल्ड कप के मंच पर डेब्यू किया और अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया।
गोल नहीं करने का होगा मलाल
सरप्रीत 90 मिनट तक मैदान में रहे, लेकिन इस दौरान वह एक भी गोल नहीं दाग पाए, जिसका उन्हें मलाल रहेगा। दस नंबर की जर्सी पहने सरप्रीत ने ईरान के गोल पर तीन शॉट लगाए, लेकिन वह ईरान के गोलकीपर को चकमा नहीं दे पाए।
पहले नहीं है सरप्रीत सिंह
इससे दो दिन पहले ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेलने वाले भारतीय मूल के एक अन्य खिलाड़ी निशान वेलुपिल्ले ने कनाडा के वैंकूवर में तुर्किए के खिलाफ अपनी टीम की 2-0 की जीत में विश्व कप में डेब्यू किया था। हालांकि, 25 वर्षीय विंगर स्टार्टिंग प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं था और वह 60वें मिनट में सब्सिट्यूट खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरे। वेलुपिल्ले का जन्म मेलबर्न में एक एंग्लो-इंडियन मां और श्रीलंकाई तमिल मूल के एक मलेशियाई पिता के घर हुआ था। सरप्रीत ने 2017 और 2019 फीफा अंडर-20 विश्व कप में भी न्यूजीलैंड का प्रतिनिधित्व किया था।
2006 में धोरासू बने थे पहले भारतीय
वर्तमान विश्व कप से पहले इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले एकमात्र खिलाड़ी फ्रांस के विकास धोरासू थे। उन्होंने जर्मनी में खेले गए 2006 के विश्व कप में स्थानापन्न खिलाड़ी के रूप में दो ग्रुप मैच खेले थे। मौजूदा टूर्नामेंट में भारतीय मूल के दो अन्य खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिल सकता है। यह खिलाड़ी कांगो के सैमुअल मौतौसामी और कतर के तहसीन मोहम्मद जमशेद हैं।
तहसीन को 13 जून को कतर की तरफ से स्विट्जरलैंड के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ रहे मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था। अब यह देखना बाकी है कि मौतौसामी को बुधवार को क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल की टीम के खिलाफ कांगो की तरफ से खेलने का मौका मिलता है या नहीं।
