दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने शनिवार को फ्रेंच ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जापान की हिना अकेची पर रोमांचक जीत दर्ज की। भारतीय स्टार ने अकेची को तीन गेम तक चले रोमांचक मुकाबले में 21-10, 20-22, 21-16 से हराकर इस साल दूसरी बार सुपर 750 टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। सिंधू ने यह मुकाबला एक घंटे 13 मिनट में अपने नाम किया। इस 31 वर्षीय खिलाड़ी ने इससे पहले जुलाई में जापान ओपन सुपर 750 का खिताब जीता था।
पीवी सिंधू (साभार-X)
सिंधू ने कहा, ’’ मुझे मैच जीतकर फाइनल में पहुंचने की थोड़ी खुशी जरूर है, लेकिन मेरा काम अभी पूरा नहीं हुआ है। अब मेरा पूरा ध्यान अगले मुकाबले पर है और मुझे उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।" विश्व रैंकिंग में 22वें स्थान पर काबिज 21 वर्षीय अकेची ने इस सप्ताह वांग झी यी और पुतरी कुसुमा वारदानी जैसी खिलाड़ियों को हराकर अपनी क्षमता का परिचय दिया था। जापान की खिलाड़ी ने सिंधू को भी अपनी चतुराई भरे शॉट और मजबूत रक्षात्मक खेल से परेशान किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ी निर्णायक क्षणों में अपना संयम बनाए रखने में सफल रहीं।
काम अभी पूरा नहीं हुआ
सिंधू के सामने फाइनल में दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर एक आन से यंग की चुनौती होगी। उन्होंने कहा, "मुझे उसे कड़ी टक्कर देनी होगी। मुकाबला कांटे का होना चाहिए। हर अंक अहम होगा। हम दोनों कई बार एक-दूसरे के खिलाफ खेल चुके हैं और वह लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है।’’ भारतीय खिलाड़ी ने कहा, ’’वह इस समय अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में है, लेकिन मेरा मानना है कि कल का दिन अलग होगा। मुझे बस मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।’’
शुरुआती गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। स्कोर 4-4 और फिर 8-8 की बराबरी पर पहुंचा। इसके बाद सिंधू ने लय हासिल करते हुए ब्रेक तक 11-9 की बढ़त बना ली। ब्रेक के बाद भारतीय खिलाड़ी ने पूरी तरह दबदबा कायम करते हुए अंतिम 12 में से 11 अंक जीतकर महज 18 मिनट में पहला गेम 21-10 से अपने नाम कर लिया।
पूर्व विश्व चैंपियन सिंधू को दूसरे गेम में शुरुआत में चार अंकों से पिछड़ रही थी लेकिन उन्होंने खेल की रफ्तार बढ़ाकर स्कोर 7-7 से बराबर कर दिया। दोनों खिलाड़ियों के बीच 10-10 तक कड़ा मुकाबला चला, जिसके बाद अकेची ने बढ़त बनानी शुरू कर दी। विश्व रैंकिंग में 11वें स्थान पर मौजूद सिंधू ने हार नहीं मानी और क्रॉस-कोर्ट स्मैश तथा चतुराई भरे रिटर्न से उन्होंने जापान की खिलाड़ी को चुनौती दी। स्कोर 14-14 तथा फिर 16-16 से बराबर किया। अकेची ने गेम प्वाइंट हासिल कर लिया।
सिंधू ने लंबी रैली के बाद 20-20 की बराबरी करके उसे बचाया, लेकिन अकेची ने एक और मौका हासिल कर लिया और सिंधू के शॉट के बाहर जाने पर 22-20 से गेम जीत लिया। सिंधू ने निर्णायक गेम में 5-3 की बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन अकेची ने वापसी करते हुए 6-5 से बढ़त बना ली। भारतीय खिलाड़ी ने फिर से नियंत्रण हासिल किया और मध्यांतर तक दो अंकों की बढ़त बनाए रखी। क्रॉस-कोर्ट रिटर्न और शानदार नेट शॉट से सिंधू ने अपनी बढ़त बढ़ाई, लेकिन अकेची ने नेट का शानदार इस्तेमाल करने के साथ ताकतवर स्मैश के दम पर स्कोर 15-15 कर दिया। मुकाबले का निर्णायक मोड़ 38 शॉट तक चली रैली में आया, जिसका अंत अकेची की नेट पर हुई गलती से हुआ। इससे सिंधू को 18-16 की बढ़त मिल गई।
इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने बेहतरीन नेट शॉट लगाकर जीत की ओर कदम बढ़ाए। अकेची के शॉट बाहर जाने से सिंधू को चार मैच प्वाइंट मिले। उन्होंने क्रॉस-कोर्ट स्मैश लगाकर मुकाबले पर मुहर लगा दी। सिंधू का प्रदर्शन इस साल प्रभावशाली रहा है। जापान ओपन का खिताब जीतने के अलावा वह नयी दिल्ली में हुई विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में भी पदक जीतने के करीब पहुंची थीं। सिंधू ने कहा कि नयी सहयोगी टीम तैयार करने और ट्रेनिंग के प्रति अधिक समझदारी भरा नजरिया अपनाने से उन्हें चोटों और नतीजों में निरंतरता में कमी के दौर से उबरने में मदद मिली।
उन्होंने कहा, ’’पिछले करीब डेढ़ साल में काफी उतार-चढ़ाव रहे। वह मेरे लिए मुश्किल दौर था। ऐसे में मेरे लिए यह समझना बेहद जरूरी था कि मुझे पीछे लौटकर बिल्कुल शुरुआत से काम करना होगा।’’ उन्होंने कहा, ’’ हमने एक टीम बनाई और यह समझने की कोशिश की कि शारीरिक और मानसिक रूप से हमारी स्थिति क्या है और हम कहां खड़े हैं।" सिंधू ने कहा, "इरवानस्याह (आदि प्रतामा) के साथ काम करते हुए अब करीब दो साल होने वाले हैं। हमने खेल विज्ञान विशेषज्ञ, फिजियो और ट्रेनर के साथ भी नयी टीम भी बनाई है।’’
उन्होंने कहा, "हमारे लिए एक टीम बनाना, शरीर की स्थिति को समझना और उसके अनुसार योजनाबद्ध तरीके से काम करना बेहद जरूरी था। इससे हमें काफी फायदा हुआ। मेरा मानना है कि केवल बहुत ज्यादा मेहनत करने के बजाय हमने अब अधिक समझदारी और बेहतर रणनीति के साथ काम करना शुरू किया है। यही बदलाव हमारे लिए कारगर साबित हुआ।’’
