स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत के ध्वजवाहक के तौर पर पवन सहरावत को चुना गया है। वे तेजिंदरपाल सिंह तूर की जगह लेंगे, जिनकी आधिकारिक किट मिलने में देरी हो गई थी। तूर ने बताया कि उनकी किट इवेंट में हिस्सा लेने के लिए बहुत देर से आएगी। इसके अलावा, एथलेटिक्स टीम भी अभी अपनी यूनिफॉर्म का इंतजार कर रही है। सहरावत, मनु भाकर के साथ मिलकर भारतीय ध्वज लेकर चलेंगे।
पवन सहरावत होंगे भारत के ध्वजवाहक। फाइल फोटो
शेफ-डी-मिशन सहदेव यादव ने PTI को बताया कि पिछले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय मेंस कबड्डी टीम के अहम सदस्य सहरावत अब उद्घाटन समारोह के दौरान भारतीय दल का नेतृत्व करने में शूटिंग स्टार मनु भाकर का साथ देंगे। तूर की अनुपस्थिति का कारण आधिकारिक किट की डिलीवरी में देरी है।
एशियाई खेल 2026 का उद्घाटन समारोह शनिवार, 19 सितंबर को जापान के आइची-नागोया में होगा। भारतीय समयानुसार दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक होगी।
नहीं पहुंची है अभी किट
30 वर्षीय खिलाड़ी ने PTI को बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि उनकी किट नागोया हवाई अड्डे पर दोपहर 3 बजे पहुंचेगी, जिससे उनके पास इसे लेने और समारोह स्थल तक पहुंचने के लिए बहुत कम समय बचेगा। तूर के शामिल न हो पाने के कारण, उद्घाटन समारोह में भाकर के साथ भारतीय ध्वज ले जाने की जिम्मेदारी सहरावत को सौंपी गई है।
तूर ने भारतीय ओलंपिक संघ को दी जानकारी
तूर ने PTI से कहा, मुझे बताया गया है कि मेरी किट (नागोया) हवाई अड्डे पर दोपहर 3 बजे पहुंचेगी। हवाई अड्डे से समय पर किट लेने के बाद उद्घाटन समारोह स्थल तक पहुंचना बहुत मुश्किल होगा। इसलिए, मैंने IOA (भारतीय ओलंपिक संघ) को बता दिया है कि मैं उद्घाटन समारोह में नहीं आ रहा हूं।
एथलेटिक्स टीम को नहीं मिली है किट
इस मशहूर शॉट-पुट खिलाड़ी ने यह भी बताया कि एथलेटिक्स दल को अभी तक अपनी किट नहीं मिली है और उनका सामान अभी भी भारत में ही है। उन्होंने बताया, मेरी किट भारत में पड़ी है। एथलेटिक्स टीम में किसी को भी अभी तक अपनी किट नहीं मिली है।
देर से मिली ध्वजवाहक होने की जानकारी
एथलेटिक्स टीम 13 सितंबर से टोक्यो के पास सुकुबा विश्वविद्यालय में एक अनुकूलन शिविर (acclimatisation camp) के लिए रुकी हुई है। दल को 21 सितंबर को नागोया जाना है, जो एथलेटिक्स स्पर्धाएं शुरू होने से दो दिन पहले का समय है। तूर ने कहा कि अगर उन्हें ध्वजवाहक की अपनी जिम्मेदारियों के बारे में पहले बताया गया होता तो स्थिति अलग हो सकती थी। उन्हें इस भूमिका के बारे में शुक्रवार को ही पता चला, जिसका मतलब है कि उनके कोच, जो एक दिन पहले ही नागोया पहुंच गए थे, शायद उनके लिए किट ले सकते थे।
