स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारत की ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने चेक गणराज्य में ग्रैंड प्रिक्स में गोल्ड मेडल पर पंच लगाया। उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ देश का बल्कि असम को भी गौरवान्वित किया है। साथ ही अपने शानदार करियर में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है।
लवलीना ने जीता गोल्ड मेडल। फाइल- Assam_DSYW
असम की इस मशहूर मुक्केबाज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सबसे सफल और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुक्केबाजी सितारों में से एक के रूप में उनकी पहचान बन गई है।
लवलीना को मिली बधाई
उनकी इस जीत ने देशभर के खेल प्रेमियों और प्रशंसकों के बीच जश्न का माहौल बना दिया है और शुभचिंतकों ने एक और यादगार उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई दी है। खेल प्रेमी उनके हौसले, पक्के इरादे और अटूट लगन की तारीफ कर रहे हैं।
नई पीढ़ी को करती हैं प्रेरित
अपनी दृढ़ता, अनुशासन और जुझारू भावना के लिए जानी जाने वाली लवलीना ने कई बार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की उम्मीदों का भार उठाया है। देशभर के एथलीटों की एक नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहती हैं। 2 अक्टूबर, 1997 को असम के गोलाघाट ज़िले के बरोमुखिया नामक एक सुदूर गांव में जन्मी लवलीना बोरगोहेन के परिवार को बचपन में गुजारा करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। संघर्षों से निकलकर लवलीना ने अपनी पहचान बना ली है।
भारत की मुक्केबाजी की ताकत
यह स्वर्ण पदक उनके ऐसे करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो पहले से ही ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों के सम्मानों से सुशोभित है। प्रशंसाओं की झड़ी लगने के साथ, लवलीना की नवीनतम सफलता उनकी अटूट उत्कृष्टता और वैश्विक मंच पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता की याद दिलाती है। स्टार मुक्केबाज अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में एक मजबूत ताकत बनी हुई हैं।
