पेरिस: हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक अपने नाम किया। कांस्य पदक मुकाबले में भारतीय टीम ने स्पेन को 2-1 के अंतर से मात दी। भारत के लिए दोनों गोल 52 साल लंबे अंतराल के बाद भारतीय टीम ओलंपिक खेलों में लगातार दो पदक जीतने में सफल रही। भारतीय टीम की कोशिश पेरिस में पदक का रंग बदलने की थी लेकिन वो अपनी इस कोशिश में नाकाम रही। ऐसे में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कांस्य पदक जीतने के बाद देश से माफी मांगी है।
हरमनप्रीत सिंह
देश के लिए बहुत बड़ा मौका है लगातार दूसरा कांस्य जीतना
हरमनप्रीत सिंह ने कांस्य पदक जीतने के बाद कहा, ये पल देश के लिए और हमारे लिए बहुत बड़ा मौका है। हॉकी में ओलंपिक पदक ऐसी चीज है जिसके लिए आपको बड़ा इंतजार करना पड़ता है और बहुत से फेज से गुजरना पड़ता है। खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए ये मुश्किल भरा वक्त होता है। हम मैदान पर हमेशा जीतने के लिए जाते हैं। कई बार परिणाम हमारे पक्ष में नहीं रहते हैं। लेकिन पदक जीतना हमारे लिए गर्व की बात है।'
गोल्ड जीतने का था शानदार मौका
हरमनप्रीत ने आगे कहा, पेरिस में हमारा ड्रीम गोल्ड जीतने का था। सभी को हमारे ऊपर विश्वास था। मैं सबसे पहले पूरे देश से माफी मांगना चाहूंगा कि हम गोल्ड जीत सकते थे लेकिन बहुत करीब से गोल्ड मेडल हासिल करने से चूक गए। लेकिन अब कांस्य पदक हमें मिला है और ये हमारे लिए सबकुछ है। हमने लगातार दूसरा पदक जीता है। ये हॉकी का इतिहास है। ये भारतीय टीम के लिए बड़ी बात है कि हम बैक टू बैक मेडल जीत सके।
ओलंपिक में रहे टॉप गोल स्कोरर
हरमनप्रीत सिंह ने कांस्य पदक मुकाबले में 2 गोल किए। वो टूर्नामेंट में 10 गोल के साथ सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी भी रहे। कप्तान हरमनप्रीत ने टीम का सामने से नेतृत्व किया और टीम की मेडल जीत में सबसे अहम भूमिका अदा की।
