Exclusive: डाउट, दर्द और मेहनत... इलेक्ट्रीशियन के बेटे के मजबूत इरादे ने बदली कहानी, दुनिया सुन रही हर्ष सिंह की जुबानी

हर्ष सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में मेंस के जूडो में भारत का पहला गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। दर्द और लंबे रिहैबिलिटेशन से उबरते हुए उन्होंने 60 किग्रा कैटेगरी में हिस्सा लेने के लिए अपना वजन काफी कम किया। इस शानदार उपलब्धि ने भारत में जूडो की पहचान बढ़ाई है और अपनी प्रेरणादायक वापसी के बाद अब हर्ष सिंह की नजरें आने वाले एशियाई खेलों में पोडियम तक पहुंचने पर टिकी हैं।

उमेश कुमार, नई दिल्ली। एक समय था जब हर्ष सिंह की कॉलर बोन टूट गई थी। और जब भी यह भारतीय जूडो खिलाड़ी मैट पर उतरता तो उसे चोट की याद आ जाती है, जिसने लगभग उनका करियर खत्म ही कर दिया था। लेकिन हर्ष सिंह ने हौसला कभी नहीं हारा। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में दर्द पीछे छूट गया और 23 साल के इस खिलाड़ी ने इतिहास रचते हुए भारत के लिए मेंस के जूडो में पहला गोल्ड मेडल जीता।

Harsh Singh Judo.

गोल्ड मेडलिस्ट हर्ष सिंह से खास बातचीत।

हर्ष सिंह ने टाइम्स नाउ नवभारत से खास बातचीत करते हुए कहा, उस टाइम मैं तो बच्चा था। तो फाइनल बाउट के दौरान मैं कंधे के बल मैट पर गिर गया था। तो कॉलर बोन टूट गई थी। उस समय मिलने आने वाले रिश्तेदार कहते थे कि इससे अब ज्यादा मत कराओ। बच्चा है, जिंदगी की शुरुआत हुई है। ऐसी चोट लगती रहेगी तो इसके लिए अच्छा नहीं रहेगा। तब मेरा यही कहना था कि गेम छोड़ दूंगा तो क्या करूंगा। चोट का क्या है लगती रहेंगी।

End of Feed