शनिवार, 6 जून वो तारीख जब टीम इंडिया के टी20 टीम के नए युग की शुरुआत होगी। सेलेक्शन कमेटी की इस बैठक में अगले दो साल यानी टी20 वर्ल्ड कप 2028 की योजना तैयार कर ली जाएगी। इस कड़ी में सबसे बड़ा फैसला लिया जा चुका है और इस पर आधिकारिक मुहर लगनी बाकी है। दो महीने पहले भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव की छुट्टी हो गई है और उसे रिप्लेस करेंगे श्रेयस अय्यर जो पिछले 3 साल से टी20 सेटअप से बाहर थे। इसके अलावा आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए कुछ नए चेहरों का भी ऐलान किया जा सकता है, जिसको लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है वो हैं वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने हाल ही में आईपीएल में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप सहित 5 अवॉर्ड अपने नाम किए थे और इस दौरान उन्होंने कितने ही दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया था।
सूर्यकुमार यादव (साभार-X)
लगातार दूसरे साल अगरकर के ठोस कदम
यह लगातार दूसरा साल है जब सेलेक्शन कमेटी ने भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस तरह के कड़े फैसले लिए हैं। इससे पहले अजीत अगरकर की अगुवाई वाली सेलेक्शन कमेटी ने रोहित शर्मा को हटाकर शुभमन गिल को वनडे टीम की कमान सौंप दी थी। अजीत अगरकर की टीम एक खास रोडमैप को फॉलो कर रही है, जिसके तहत किसी भी नए कप्तान को दो साल का वक्त दिया जा रहा है। इसी के तहत गिल को वनडे टीम की कमान सौंपी गई थी और इसी तर्ज पर सूर्या को भी टी20 टीम का कप्तान बनाया गया था।
कप्तान के तौर पर बेहतरीन सूर्या
कप्तान के तौर पर सूर्यकुमार यादव शानदार थे। 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 मैच की टी20 सीरीज बतौर कप्तान उनका पहला असाइनमेंट था। पहले सीरीज से बतौर कप्तान टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनने तक उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कप्तान के तौर पर सूर्या ने 52 टी20 मैच खेले और उसमें से 40 मैच में उन्हें जीत मिली। लेकिन सवाल उठता है जब सूर्या इतने अच्छे थे तो आखिर उन्हें क्यों कप्तानी से हाथ धोना पड़ा? चलिए इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्यों सूर्यकुमार यादव की कप्तानी उनसे ले ली गई?
1. बल्लेबाज के तौर पर फेल सूर्या
कप्तान के तौर पर कमाल सूर्या ने बतौर बल्लेबाज पूरी तरह से फेल रहे। पिछले एक साल की बात करें तो कभी टी20 का यह नंबर वन बल्लेबाज एक-एक रन के लिए तरसता नजर आया। टीम इंडिया उनके लीडरशिप में टी20 वर्ल्ड कप का खिताब बचाने में जरूर कामयाब रही, लेकिन बल्लेबाज के तौर पर वो हमेशा निशाने पर रहे। सूर्या ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 9 पारी में केवल 242 रन बना पाए। उस दौरान उनके बल्ले से केवल एक अर्धशतक निकला जो यूएसए के खिलाफ आया था। इतना ही नहीं आईपीएल में उनके वापसी की उम्मीद थी, लेकिन वहां भी उन्होंने निराश किया। आईपीएल 2026 में 13 पारी में सूर्या ने 20.76 की मामूली औसत से केवल 270 रन बनाए।
2. उम्र भी है बड़ी वजह
सूर्यकुमार यादव 35 साल के हो चुके हैं और अगर टीम उनके साथ कंटिन्यू करती तो 2028 टी20 वर्ल्ड कप में वो 37 साल के होते और ऐसे में इतनी ज्यादा टी20 क्रिकेट हो रही है और इसमें फिटनेस को हाई लेवल पर मेंटन रखना आसान काम नहीं है। विराट जैसे खिलाड़ी को भी इस साल बतौर इंपैक्ट प्लेयर खेलना पड़ा था। ऐसे में टीम मैनेजमेंट ने उनसे आगे बढ़ने का मन बना लिया था।
3. टीम फर्स्ट की नीति पड़ी भारी
कप्तान बनाए जाने के बाद सूर्यकुमार यादव ने कहा था कि वो कभी भी पर्सनल माइलस्टोन के बारे में नहीं सोचते हैं। टीम जीत रही है, यह जरूरी है, लेकिन इस दौरान वो भूल गए कि उन्हें खुद को भी साबित करना है। इसका खामियाजा उन्हें अब भुगतना पड़ा। सूर्या की ना केवल कप्तानी गई बल्कि बतौर खिलाड़ी भी टीम में उनकी जगह मुश्किल लग रही है।
टीम से बाहर चल रहे अय्यर पड़े भारी
श्रेयस अय्यर ने अपना आखिरी टी20 मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जनवरी 2023 में खेला था। उसके बाद वो लगातार टी20 सेटअप से बाहर थे, लेकिन अब वह बतौर कप्तान टीम से जुड़ने के लिए तैयार हैं। हालांकि, हालिया न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अय्यर को रिप्लेसमेंट के तौर पर शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। अब सवाल उठता है कि अय्यर को क्यों तरजीह दी गई?
कप्तान के तौर पर खुद को किया साबित
अय्यर ने बतौर कप्तान बीते कुछ सालों में खुद को साबित किया है। 2024 में केकेआर को चैंपियन बनाने से लेकर 2025 में पंजाब किंग्स को फाइनल में पहुंचाने वाले अय्यर ने इस साल भी पंजाब किंग्स के साथ धमाकेदार शुरुआत की। खास बात यह है कि वह सामने से टीम का नेतृत्व करते हैं। कप्तानी करने के साथ-साथ अय्यर बल्ले से भी लगातार कमाल दिखा रहे हैं। उन्होंने 2025 आईपीएल में 604 रन तो 2026 में 498 रन बनाए।
आसान नहीं अय्यर का सफर
टीम इंडिया का नेतृत्व करना आसान नहीं है। यहां सीरीज दर सीरीज कप्तान और कोच का आंकलन किया जाता है और सवाल उठते रहते हैं। ऐसे में अय्यर के सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती इंग्लैंड का दौरा होगा, जहां उन्हें जीत के साथ-साथ टीम के साथ सामंजस्य बिठाने पर काम करना होगा। उनके पास ओलंपिक और 2028 वर्ल्ड कप से पहले ठीक-ठाक समय है और उन्हें इसका इस्तेमाल भारतीय क्रिकेट को और आगे ले जाने के लिए करना होगा और इस राह में उन्हें गौतम के गंभीर सलाह की दरकार होगी।
