सरकार ने आगामी खेल प्रशासन विधेयक से हटाया नियामक शब्द, राष्ट्रीय खेल बोर्ड को दिए व्यापक अधिकार

सरकार ने मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक से नियामक शब्द हटा दिया है और राष्ट्रीय खेल बोर्ड को व्यापक अधिकार दिए हैं।

नई दिल्ली: मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक से नियामक शब्द हटा दिया गया है, लेकिन यह एक राष्ट्रीय खेल बोर्ड (एनएसबी) को संस्थागत रूप देने के लिए तैयार है जिसकी नियुक्ति पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी और इसके पास चुनावी अनियमितताओं से लेकर वित्तीय गड़बड़ी तक के उल्लंघनों के लिए शिकायतों या ‘खुद के प्रस्ताव’ के आधार पर संघों की मान्यता निलंबित करने की व्यापक अधिकार होंगे। सोमवार से मानसून सत्र शुरू हो रहा है और इसी दौरान संसद में पेश किए जाने वाले इस विधेयक में प्रशासकों की आयु सीमा के पेचीदा मुद्दे पर कुछ रियायतें दी गई हैं जिसमें 70 से 75 वर्ष की आयु के लोगों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है बशर्ते संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थायें आपत्ति नहीं करें। लेकिन प्रस्तावित एनएसबी जवाबदेही की एक कठोर प्रणाली बनाने का वादा करता है जो गुटबाजी और अंदरूनी कलह से पस्त भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की प्रतिष्ठा को काफी कम कर देगा।

Mansukh Mandaviya

मनसुख मांडवीय( फोटो क्रेडिट PTI)

केंद्र सरकार करेगी अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति

एनएसबी में एक अध्यक्ष होगा और इसके सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। बोर्ड के सदस्यों से यह भी अपेक्षा की जाएगी कि सदस्यों के पास ‘लोक प्रशासन, खेल प्रशासन, खेल कानून और अन्य संबंधित क्षेत्रों का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव’ हो। मसौदा विधेयक हितधारकों और जनता से व्यापक परामर्श के बाद तैयार किया गया है जिसके अनुसार नियुक्तियां ‘सर्च कम सलेक्शन’ समिति की सिफारिशों के आधार पर की जाएंगी।

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