अपने देश की क्रिकेट टीम में नहीं मिली जगह तो दूसरे देश पहुंच गया यह खिलाड़ी

Dawood Ahmadzai: अफगानिस्तान की जर्सी का सपना आंखों में लिए दाउद का सफर उसे शरणार्थी बनाकर फ्रांस ले आया। 32 साल के लेग स्पिनर दाउद ने पीटीआई से बातचीत में अपना दर्द बयां किया।

Dawood Ahmadzai: कभी टीवी पर हशमतुल्लाह शाहिदी की बल्लेबाजी और मोहम्मद नबी की फिरकी देखकर दाउद अहमदजई की आंखें भर आती थीं। अंडर-19 में शाहिदी, नबी, गुलबदिन नायब और नजीबुल्लाह जदरान के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने वाला ये खिलाड़ी खुद से पूछता था, "क्या मेरे भीतर अब क्रिकेट बचा भी है?" अफगानिस्तान की जर्सी का सपना आंखों में लिए दाउद का सफर उसे शरणार्थी बनाकर फ्रांस ले आया। 32 साल के लेग स्पिनर दाउद ने पीटीआई से बातचीत में अपना दर्द बयां किया। "कई बार टीवी पर अपने दोस्तों को खेलते देखकर मैं रो देता था। हमने साथ में बहुत क्रिकेट खेली है। लगता था कि मेरी जिंदगी आखिर किस मोड़ पर आ गई। मैं भी अफगानिस्तान की जर्सी पहनना चाहता था, लेकिन किस्मत मुझे कहीं और खींच ले गई।"

dawood ahmadzai

दाउद अहमदजई (dawood ahmadzai)

शून्य से शुरू हुआ यूरोप का सफर

अफगानिस्तान छोड़ने के बाद दाउद के लिए यूरोप में सब कुछ नया था। फ्रांस में शरण लेने के बाद क्रिकेट खेलना आसान नहीं था। क्लब क्रिकेट के लिए वो 11 घंटे बस में सफर कर पेरिस से एम्सटर्डम जाते थे। ट्रेन का टिकट महंगा पड़ता था, इसलिए बस ही सहारा थी। कई बार भरपेट पौष्टिक खाना भी नसीब नहीं होता था। दाउद बताते हैं, "मैच खेलने के लिए 11 घंटे जाना और 11 घंटे वापस आना पड़ता था। शरीर टूट जाता था, लेकिन हौसला नहीं। मुझे यकीन था कि बुरा वक्त गुजर जाएगा। क्रिकेट छोड़ने का ख्याल एक बार भी नहीं आया।" यही जिद रंग लाई और दाउद फ्रांस के लिए 50 से ज्यादा टी20 विकेट लेने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बन गए।

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