न्यूजीलैंड के युवा स्टार क्रिकेटर मुहम्मद अब्बास का जन्म लाहौर में हुआ। जब वह एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूीर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर चला गया था। अब पाकिस्तान की कोई खास याद उनके जहन में नहीं है। हालांकि, पहचान दो देशों से मिली, खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड।
मुहम्मद अब्बास, फाइल फोटो
दैनिक अखबार को दिए इंटरव्यू में मुहम्मद अब्बास कहते हैं, 'मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।' यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, 'मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।' बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने।
पिता ने दी कोचिंग
अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता के चलते हुई। उनके पिता ही उनके कोच हैं। वे बताते हैं, 'मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।' पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।
एक फैसले ने बदली जिंदगी
कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंग्टन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंग्टन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यहीं से उनका पूरा जीवन बदल गया। इसी बदलाव ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहचान दिला दी। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला।
डेब्यू मैच में रचा इतिहास
मजे की बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं 'यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।' उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंद मे 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच मे सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया।
दिग्गज खिलाड़ियों के साथ करते हैं ड्रेसिंग रूम साझा
अब्बास ने कहा, मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता। टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है।
