Yogini Ekadashi 2024 Parana Time, Vrat Vidhi, Significance And Katha (योगिनी एकादशी 2024): योगिनी एकादशी देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi ) से पहले मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार ये व्रत तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। कहते हैं जो कोई भी सच्चे मन से योगिनी एकादशी का व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इसके अलावा व्रत करने वाले व्यक्ति को स्वर्गलोक की भी प्राप्ति होती है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस साल योगिनी एकादशी 2 जुलाई, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी। चलिए जानते हैं योगिनी एकादशी की पूजा विधि, मुहूर्त, पारण समय और महत्व क्या है।
Yogini Ekadashi Vrat Vidhi, Puja Vidhi, Mahatva And Parana Time
योगिनी एकादशी 2024 पारण समय (Yogini Ekadshi 2024 Parana Time)
योगिनी एकादशी का पारण 3 जुलाई की सुबह 05:28 से 07:10 तक किया जा सकेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय सुबह 07:10 का है।
योगिनी एकादशी व्रत विधि (Yogini Ekadashi Vrat Vidhi)
योगिनी एकादशी के व्रत नियमों की शुरुआत दशमी तिथि से यानी व्रत के एक दिन पहले से ही हो जाती है। योगिनी एकादशी का व्रत करने वाले लोगों को दशमी की रात में जौ, गेहूं और मूंग की दाल से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन रात में नमक का सेवन भी नहीं करना चाहिए। फिर एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता। हालांकि आप फलाहार ले सकते हैं। लेकिन नमक का इस्तेमाल करने से बचें। ये व्रत द्वादशी तिथि पर खोला जाता है। व्रत खोलने से पहले ब्राह्माणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दी जाती है।
योगिनी एकादशी पूजा विधि (Yogini Ekadashi Puja Vidhi)
योगिनी एकादशी के दिन कलश स्थापना की जाती है फिर कलश के ऊपर भगवान विष्णु की प्रतिमा रखी जाती है। इसके बाद भगवान की विधि विधान पूजा करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी पत्र जरूर अर्पित करें। इसके साथ ही एकादशी को रात्रि जागरण करते हुए भगवान का भजन करते रहें। फिर अगले दिन की सुबह श्री हरि विष्णु भगवान की फिर से पूजा करें और इस दौरान ब्राह्माणों को भोजन कराकर उन्हें दान-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। फिर अपना व्रत खोल लें।
योगिनी एकादशी का महत्व (Yogini Ekadashi Significance)
मान्यताओं अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। माना जाता है ये व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य देता है। इस व्रत को करने से किसी के द्वारा दिये हुए श्राप का भी अंत हो जाता है। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति के जीवन में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है।
