दशहरा पर क्यों खाया जाता है जलेबी और पान, जानें इस परंपरा के पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण?

Dussehra 2025: आज विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। इसके दशहरा के नाम से भी जाना जाता है। दशहरा के पर्व पर जलेबी और पान खाने की परंपरा निभाई जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है? अगर नहीं तो आज हम आपको इसके पीछे की रोचक कथा के बारे में बताएंगे।

Dussehra 2025:दशहरा के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था । वहीं, माता दुर्गा ने भी इसी दिन महिषासुर का संहार किया था। नवरात्रि के नौ दिनों के उपवास और पूजा के बाद दशमी तिथि को लोग उत्साह के साथ दशहरा मनाते हैं। इस पर्व की जलेबी और पान खाना एक खास परंपरा है। खासकर उत्तर भारत और गुजरात में इसको लोग मान्यताओं से जोड़ते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह परंपरा क्यों शुरू हुई और इसके पीछे क्या धार्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं? अगर नहीं तो आइए जानते हैं।

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दशहरा पर क्यों खाई जाती है जलेबी और पान? (pic credit- canva)

क्यों खाई जाती है दशहरा पर जलेबी?

एक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम को 'शश्कुली' नामक मिठाई बहुत पसंद थी, जिसे आज की जलेबी का प्राचीन रूप माना जाता है। कथा है कि लंका पर विजय के बाद हनुमान जी ने राम के लिए जलेबी और फाफड़ा बनवाया था। यह मिठाई राम की विजय और खुशी का प्रतीक बनी। दशहरा पर जलेबी खाना और बांटना भगवान श्रीराम की विजय को सेलिब्रेट करने का तरीका है। गुजरात में फाफड़ा-जलेबी की जोड़ी को राम-सीता के मिलन और विजय के उत्सव से जोड़ा जाता है।

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